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UP में भी गठबंधन खतरे में, अखिलेश यादव ने राहुल की यात्रा से बनाई दूरी
INDIA alliance may break in UP also: बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी इंडिया गठबंधन खतरे में पड़ गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिए जाने तक उनकी पार्टी राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में हिस्सा नहीं लेगी। इस समय राहुल की यात्रा उत्तर प्रदेश में ही है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 11 सीटों की पेशकश की थी, वहीं कांग्रेस का मानना है कि उसे ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। ऐसे में यदि दोनों दल अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं कि यह गठबंधन यूपी में भी टूट जाए। जयंत चौधरी पहले ही इंडिया गठबंधन से अलग होकर एनडीए के पाले में जा चुके हैं।
सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद : राहुल गांधी की यात्रा सोमवार को अमेठी से होकर गुजरेगी है और इसके बाद रायबरेली जाएगी। रायबरेली में सपा प्रमुख को यात्रा में शामिल होना था। लेकिन, नए राजनीतिक घटनाक्रम में अखिलेश यात्रा में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में अटकलें हैं कि यदि सीटों के बंटवारे में दोनों पार्टियों के बीच सहमति नहीं बनी तो यह गठबंधन यूपी में भी टूट जाएगा।
हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों की ही स्थिति अच्छी नहीं थी। कांग्रेस ने तो अपनी परंपरागत अमेठी सीट को भी गंवा दिया था। यहां से पार्टी के दिग्गज नेता भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गए थे। ऐसे में यदि गठबंधन बना रहता है तो दोनों ही दलों को फायदा होगा, अन्यथा दोनों ही दल नुकसान में रहेंगे। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने पूर्व में कहा था कि उनकी पार्टी को करीब 2 दर्जन सीटें दी जानी चाहिए, जहां 2009 के लोकसभा चुनावों में उसने जीत दर्ज की थी।
पिछले चुनाव में भाजपा ने जीती थीं 62 सीटें : पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 64 (भाजपा 62, अपना दल 2) सीटें जीती थीं, वहीं बसपा 10 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही थी। समाजवादी पार्टी को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस एकमात्र रायबरेली सीट पर जीत हासिल कर पाई थी। रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव जीती थीं। इस बार सोनिया राज्यसभा जाएंगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए रायबरेली सीट पर भी कड़ी चुनौती मिल सकती है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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