Delhi Election Results : दिल्ली चुनाव में केजरीवाल की जीत के 5 बड़े कारण

Author विकास सिंह| Last Updated: मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020 (12:34 IST)
दिल्ली में नतीजों से साफ हो गया है कि लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने जा रहे है। चुनाव में आम आदमी पार्टी की के एक नहीं कई कारण रहें।

1-केजरीवाल का करिश्माई चेहरा – दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत का सबसे बड़ा कारण चुनावी मैदान में केजरीवाल को चेहरे के मोर्चे पर वॉकओवर मिलना है। पूरे चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल के करिश्माई चेहरे को मुद्दा बनाते हुए खूब भुनाया और भाजपा को खुली चुनौती दी। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा को चेहरे के मुद्दे पर खुला चैलेंज दिया और पूरे चुनाव में भाजपा इसका तोड़ नहीं ढूंढ सकी।
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मुफ्त का चुनावी ट्रंप कार्ड –
दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड केजरीवाल सरकार के पिछले 5 सालों में दिल्ली की जनता को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को मुफ्त में उपलब्ध कराना रहा। इसके साथ ही वोटिंग से ठीक पहले ने जो अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया उसमें भी दिल्ली की जनता से कई ऐसे लोकलुभावन वादे किए गए है जिसने लोगों को एक बार आम आदमी पार्टी की ओर मोड़ दिया।.

3- केजरीवाल की स्वच्छ छवि – दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की स्वच्छ छवि भी उसकी जीत का बड़ा कारण साबित हुई। आम आदमी पार्टी ने पूरे चुनावी कैंपेन में मुख्यमंत्री केजरीवाल की स्वच्छ छवि को लोगों के बीच खूब भुनाया और अब नतीजे बताते है कि जनता ने उस पर अपनी मोहर लगा दी।

4 – पीएम मोदी पर हमला नहीं करना – दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में इस बात का ध्यान रखा कि उसका कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सियासी हमला नहीं कर सके। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर एक भी विवादित बयान नहीं दिया, जिसका फायदा आप को मिला है और भाजपा तमाम कोशिशों के बाद भी चुनाव को मोदी के चेहरे पर नहीं ला सकी।

5- विवादित बयानों और मुद्दों से केजरीवाल का दूर रहना – दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत का बड़ा कारण मुख्यमंत्री केजरीवाल का विवादित मुद्दों से दूर रहना रहा। दिल्ली चुनाव में सबसे चर्चित शाहीन बाग के मुद्दें पर मुख्यमंत्री केजरीवाल लगभग खमोश रहे। चुनाव में जहां भाजपा नेता विवादित बयान देते रहे लेकिन आम आदमी पार्टी की तरफ से एक भी विवादित बयान न आना उसकी चुनावी रणनीति को साफ बताता है।




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