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जयंती विशेष : सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कवि थे मैथिलीशरण गुप्त

सोमवार,अगस्त 2, 2021
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रणछोड़ दास पागी एक ऐसा ही नाम है जो थे तो महज भेड़, बकरी और ऊंट पालने वाले एक सामान्‍य से व्‍यक्‍ति, लेकिन जब भारत की पाकिस्‍तान के साथ 1965 और 1971 के युद्ध की बात होती है तो उनका योगदान सबसे ज्‍यादा नजर आता है।
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बीते बरस प्राकृतिक आपदाओं के कारण दुनियाभर में बेघर हुए लोगों की संख्या 10 बरसों में सबसे ज्यादा रही। जहां साढ़े 5 करोड़ लोग अपने ही देशों में विस्थापित हुए वहीं ढ़ाई करोड़ से ज्यादा दूसरे देशों में शरणागत हुए।
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मित्र के तीन लक्षण हैं-अहित से हटाना, हित में लगाना, मुसीबत में साथ न छोड़ना,धन के अभाव में विश्व में जो लोग मित्रों का कार्य करते हैं उन्हें ही मित्र समझता हूं...अच्छी स्थिति वाले व्यक्ति की वृद्धि में कौन साथ नहीं देता।
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दोस्ती एक ऐसा आकाश है जिसमें प्यार का चंद्र मुस्कुराता है, रिश्तों की गर्माहट का सूर्य जगमगाता है और खुशियों के नटखट सितारे झिलमिलाते हैं। एक बेशकीमती पुस्तक है दोस्ती, जिसमें अंकित हर अक्षर, हीरे, मोती, नीलम, पन्ना, माणिक और पुखराज की तरह है, ...
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स्‍कूल जा रहे बच्‍चों को अपनी लाइफ में कॉलेज लाइफ का ब्रेसबी से इंतजार रहता है। क्‍योंकि वहां पर वह आजादी महसूस करते हैं, पढ़ना हो तो पढ़ो वरना नहीं, कभी क्‍लास बंक मार दी और दोस्‍तों के साथ घुमने निकल पड़ते हैं। लेकिन कॉलेज लाइफ ऐसा पड़ाव होता है ...
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व्हाट्सएप ने अमेरिका के कैलिफोर्निया के एक न्यायालय में इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली इजरायली कंपनी एनएसओ के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आपको यह भी याद होगा कि तत्कालीन सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अक्टूबर 2019 में ही बाजाब्ता ट्विटर पर ...
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मैं कभी ऐसा लेखक नहीं रहा जिसे तुम सीने से लगाओ। अगर तुम हिंदीवाले हो तो तुम्हें सीने से प्रेमचंद, रेणु और मुक्तिबोध को ही लगाना चाहिए; मुझे नहीं।
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1995 में डिंपल कैप्‍टन विक्रम बत्रा से मि‍लीं, 1996 में विक्रम सेना में चले गए। 1999 में वि‍क्रम कारगिल वॉर में शहीद हो गए। इन पांच सालों में कुछ ही वक्‍त डिंपल और विक्रम साथ में रहे। लेकिन विक्रम ने जहां देश की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर देश ...
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रिश्तों में स्पष्ट संचार और वार्तलाप बेहद आवश्यक है, मस्ती-मजाक, रूठना-मनाना भी रिश्तों को मजबूती देता है, एक-दूसरे को समय देना और एक-दूसरे की निजता का भी सम्मान करना ज़रूरी है... लेकिन क्या इसकी आड़ में हर बात पर ‘अबोला’ सही है?
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1971 का साल था। भारत की पाकिस्‍तान के साथ ऐतिहासिक जंग हो रही थी, इस जंग में पाकिस्‍तान ने इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के बेस पर लगातार करीब 14 दिनों तक बम बरसाए थे। इस आपॅरेशन को पाकिस्‍तान ने ऑपरेशन चंगेज खां नाम दिया था। लेकिन भारतीय वायु सेना के ...
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बम के धमाकों के बीच उस समय जो नाम देश में सबसे ज्‍यादा गूंज रहा था वो नाम था कैप्‍टन विक्रम बत्रा का।
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इसे आधुनिक दासता के रूप में भी जाना जाता है। बच्चे और महिलाएं इसका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। कोरोनाकाल में बाल दुर्व्यापार बढ़ा है। आशंका जताई जा रही है कि लॉकडाउन से उपजे आर्थिक संकट के चलते भविष्य में जबरिया बाल मजदूरी, यौन व्यापार, भिखमंगी, बाल ...
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा एक बार फिर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने की तैयारी में हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि वे अपनी उम्र के आधार पर मुख्यमंत्री पद छोड दे, लेकिन येदियुरप्पा ऐसा करने को तैयार नहीं दिखते। हालांकि ...
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टेक्‍नालॉजी ने आदमी और प्रजातंत्र दोनों को ही ख़त्म कर देने की कोशिशों को आसान कर दिया है। दुनिया के कुछ मुल्कों, जिनमें अमेरिका आदि के साथ भारत भी शामिल हो रहा है, ने स्थापित कर दिया है कि सत्ता में बने रहने के लिए करोड़ों नागरिकों का विश्वास जीतने ...
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गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रस्तुत है संत कबीर के गुरु पर रचे दोहे
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कोरोना ने अभी गति को विराम दे दिया है। विशेषतौर पर मनुष्‍य को एवं मनुष्‍य द्वारा नियंत्रित गतिविधियों, उपकरणों, यंत्रों, मशीनों साधनों को भी। कुछ वर्षों से मनुष्‍य की गति बहुत अधिक तीव्र हो गई थी। चारों तरफ भागमभाग, रेलपेल, हर काई तीव्र गति से भाग ...
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जन्मदिन के एक दिन पहले, रौनक रिद्धि को डिनर पर ले गया, जहाँ वह पूरे समय अपने फ़ोन पर ही लगा रहा। खाना हो गया और दोनों घर आ गए। 12 बजे रात को बड़े बेमन से रौनक ने रिद्धि से केक कटवाया, जिससे रिद्धि उदास हो गई।
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27 सफदरजंग, फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया का निवास बन जाए तो चौंकिए मत। लुटियंस जोन की इस कोठी से सिंधिया परिवार का नाता बहुत पुराना है। माधवराव सिंधिया सालों इसी कोठी में रहे और सांसद बनने के बाद से 2019 का लोकसभा चुनाव हारने तक यही कोठी ज्योतिरादित्य ...
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‘सादगी’ के नाम पर दिखावा करने वाले ये पढ़े-लिखे आधुनिक परिवार के लोग क्या कभी अपने खुद के बेटे की ख़ुशी की कीमत पैसे से आंकना छोड़ सकेंगे? क्या ये पढ़े-लिखे बड़े कॉलेजों से पढ़ने वाले लड़के अपने घर में अपना मुंह खोल कर बदलते हुए समाज और परिदृश्य का सच अपने ...
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