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जो रील लाइफ का ‘मुन्‍ना भईया’ है, कहीं वो ‘डॉन मुन्‍ना बजरंगी’ तो नहीं?

शनिवार,अक्टूबर 31, 2020
mirzapur munna bhaiya
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सरदार पटेल बहुत ही मृदुभाषी थे। वे कम बोलने और ज्‍यादा काम करने में यकीन रखते थे। अपने पूरे राजनीति‍क जीवन में पटेल ने कभी कोई विवादित बयान नहीं दिया। हालांकि पीएम मोदी के कई बयान ऐसे हैं जिनसे विवाद पैदा हुए। जहां सरदार पटेल कम बोलते थे, वहीं मोदी ...
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यह मैगजीन साल 1970 में शुरू हुई थी। उस दौरान इस मासिक पत्रिका का नाम ‘हारा किरी एब्दो’ रखा गया था, जिसे पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स दी गॉल की मौत के बाद मजाक उड़ाने के आरोप में बैन कर दिया गया था। इसके बाद 1981 में इस मैगजीन को बंद कर दिया गया
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तसलीमा नसरीन बांग्लादेश की जानी-मानी लेखिका हैं, वे अब तक कई किताबें लिख चुकी हैं, वे कविताएं लिखती हैं और उनकी एक नॉवेल ‘लज्‍जा’ पर भारत में फि‍ल्‍म भी बन चुकी है। इस फि‍ल्‍म के बाद उनके खि‍लाफ फतवा जारी कर दिया गया था।
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हमारे देश में दो शब्द प्रचलन में है एक धर्मनिरपेक्षता और दूसरा सर्वधर्म समभाव। सेकुलर शब्द को हमारे देश में धर्मनिरपेक्ष कहा जाता है परंतु इसका सही अर्ध है संप्रदाय या मत निरपेक्षता। खैर, हम शाब्दिक अर्थ के पचड़े में नहीं पड़ते और मुद्दे की बात करते ...
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बदली में ही चांद सबसे ज्यादा खूबसूरत और दिलकश लगता है। हल्का-हल्का, झीना-झीना परदा सरकाकर आकाश में थिरकता और दमकता चांंद मुझे दुनिया का सबसे हसीन मित्र लगता है। आप इसे दृश्य कह लीजिए मेरे लिए तो एक पूरा जीवन और उसका समस्त सौन्दर्य समेटे 'दर्शन' है ...
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शरद की पूनम रात में चांद शबाब पर होता है। अमृत बरसाता हुआ,धवल चांदनी बिखेरता हुआ और पूरा का पूरा दिल में उतरता हुआ। कुछ-कुछ केसरिया, कुछ-कुछ बादामी। जैसे केसर महक उठी हो गहरे नीले आकाश में।
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चाहे भारत हो या जापान, चीन हो या ग्रीस, रोम हो या इजिप्‍ट। ये ऐसी चीजें हैं जो पूरी दुनिया के लोगों में एक जैसी, एक समान हैं। बावजूद इसके कि रंग, भाषा और कल्‍चर और आबोहवा अलग-अलग हैं।
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लव, प्रेम, प्यार, मोहब्बत, कितने नाजुक अल्फाज़ है ये किसने इनके साथ जिहाद जैसा शब्द जोड़ा है भाई जरा सामने तो आना.... ये किस दिमाग की कैसी उपज है जरा खुलकर तो बताना.... बार बार इस विषय पर सोचने से, बोलने से, लिखने से क्यों रोक दिया जाता है?
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तुम मार दी गई मेरे सामने, तुम छुपती रही मेरे पीछे और मैं कुछ न कर सकी। सखी थी मैं तुम्हारी, तुम्हारी राजदार, तुम्हारी हमराज, तुम्हारे साथ खिलखिलाने वाली, तुम्हारे साथ हर बात को साझा करने वाली.... आज तुम्हारी हत्या नहीं हुई आज मैं मर गई हूं... आज ...
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हमारी लोक समझ हमें सिखाती है कि जो देशज है, स्थानीय है, वे देशी हैं। इस तरह लोक मान्यता अनुसार स्वदेशी का अर्थ विदेशी नहीं होना न होकर देशज होना है, क्योंकि कोई स्वदेशी होकर भी भौतिक जीवन के हर रूप, रंग और ढंग से पूरी तरह विदेशी यानी परावलंबी होते ...
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कोई मीडिया प्रतिष्ठान चीन के साथ सीमा पर वर्तमान में चल रहे तनावपूर्ण सम्बन्धों के दौरान अगर ऐसी खबर चला दे कि सैनिकों के बीच सेनाध्यक्ष के निर्णयों के प्रति (कथित तौर पर) ‘विद्रोह’ पनप रहा है तो रक्षा मंत्रालय और सरकार को क्या करना चाहिए? भारतीय ...
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दरअसल हाल ही में नि‍र्मला सीतारमण ने कहा है कि ब‍िहार में वैक्‍सीन का न‍िशुल्‍क वितरण किया जाएगा। ठीक इसके बाद मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने भी अपने राज्‍य में गरीबों को पहले वैक्‍सीन देने की घोषणा कर डाली।
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आजकल देश और समाज में चहूंओर सोशल मीडिया का चलन बढ़ता ही जा रहा है। केवल युवा ही नहीं हर वर्ग में इसकी गहरी पैठ स्पष्ट दिखाई दे रही है। देश व समाज में सोशल मीडिया का प्रयोग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रकार से बखूबी किया जा रहा है। अब यह उपयोग ...
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रंग-बिरंगे कपड़ों के साथ मैचिंग मास्क को ‘फैशन असेसरीज’ की तरह उपयोग करें। भीड़-भड़ाके से दूर अपने प्रियों के साथ उत्सव का आनंद लें। यही अवसर है जब मां की दिल से आराधना बिना किसी चोंचले के हम कर रहे हैं। साधना की राह में सबसे बड़ी बाधा विश्वास की होती ...
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वे जनप्रतिनिधि बनने के बाद अपनी आय के माध्यम ढूंढ़ते हैं कि कैसे और किस प्रकार से, कहां-कहां से धन की वर्षा होती है वे अपने इन अभियानों में जुटकर दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी गति से आर्थिक वारे-न्यारे करने के लिए जुट जाते हैं।
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क्या हुआ जो बंधन है, क्या हुआ जो घर से निकल नहीं सकते, क्या हुआ जो आवाजों का शोर नहीं है, हंसी, खिलखिलाहटों का दौर नहीं है.... हमारे मन के आंगन के उत्सव तो हमारे हाथ में हैं ना... क्या हुआ जो रंगबिरंगे चौराहे नहीं है, घर का कच्चा-पक्का आंगन तो है ...
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मोदी चीन पर भी कुछ नहीं बोले, देश के किसी वर्ग के लिए कोई आर्थि‍क पै‍केज की घोषणा नहीं की। अपनी शख्‍स‍ियत के मुताबि‍क चौंकाने वाला कोई फैसला नहीं सुनाया।
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खेती के अपशिष्ट से बनने वाली यह प्लाई आज बाजार में उपलब्‍ध सभी प्लाई से न केवल चार गुना ज्यादा मजबूत होगी बल्कि सस्ती भी. पराली से लेमिनेटेड और गैर लेमिनेटेड दोनों तरह की प्लाई बनेंगी जिसकी कीमत गुणवत्ता के हिसाब से 26 से 46 रुपए वर्गफीट तक होगी।
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देवी क्या है, यह नवरात्रि में एकांत में बैठे किेसी साधक से पूछिए... ध्यान के दौरान होने वाले उसके साथ होने वाले चमत्कार को जानिए... उस शक्ति और विराट स्वरूपा के अंश को महसूस कीजिए...
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