किसी बात का लोड नहीं लेती इस जमाने की नई पीढ़ी
(फाइल फोटो)
अब एक एकदम नई पीढ़ी सामने है, यह पीढ़ी सोशल ऐप वाली है। वे वहां स्टोरी डालते हैं, रील बनाते हैं, फ़ोटो भेजते हैं, फ़ॉलोअर्स बनाते हैं और जैसा मन करता है, वैसे जीते हैं। उनकी मानें तो वे ज़्यादा लोड नहीं लेते। इनकी अपनी भाषा है और आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि गूगल ने भारत में हिंग्लिश पर लोकलाइज़ेशन का प्रस्ताव दिया है। तमाम तरह के लोड लेना या लोड न लेना, उनकी भाषा को समझना हो तो उनसे ठीक एक पिछली पीढ़ी या उससे पिछली पीढ़ी और उससे पिछली पीढ़ी को देखना होगा।उससे पहले की पीढ़ी कई भाई-बहनों वाली थी, कमाने वाला एक और खाने वाले कई होते थे। आर्थिक तंगी के चलते रोज़मर्रा का जीवन ही ठीक से बीत जाए, उतना ही बहुत होता था। उससे पहले की पीढ़ी के समय आज़ादी मिली ही थी और संक्रमण का अलग दौर था, और उससे पहले तो दो सौ साल की गुलामी थी ही।
आज की पीढ़ी इन सभी तनावों-बोझों से दूर है। अमूमन वे सिंगल चाइल्ड हैं, अमूमन उनके पास वह सब है, जो अच्छी जीवन शैली के लिए आवश्यक है। देखा जाए तो उनके सिर पर वैसा कोई लोड (बोझ) नहीं है। स्कूल-कॉलेजों का वातावरण भी उतना ही फ्रैंडली है और घर का भी। अभिभावक उनसे दोस्ताना व्यवहार कर रहे हैं और वे अभिभावकों को दोस्तों की तरह ही ट्रीट कर रहे हैं, कभी-कभी उनके ही शब्दों में बहुत हल्के में भी।

