shradh paksha
✕

नेता ही नहीं मतदाता भी हैं बेचैन, सता रही है इन 5 बातों की चिंता

Updated: शुक्रवार, 23 नवंबर 2018 (12:22 IST)
मध्यप्रदेश में चुनाव प्रचार अंतिम दौर में पहुंच चुका है। चुनाव लड़ रहे नेताओं की सांसें तेज हो गई हैं। मतदाताओं को रिझाने में उन्होंने कोई कौर कसर नहीं छोड़ी है। इस चुनाव में कार्यकर्ताओं की चुप्पी ने भी नेताओं को परेशान कर रखा है। हालांकि जितना नेता परेशान हैं उतनी ही बैचेनी मतदाताओं में भी दिखाई दे रही है। जानिए क्यों बेचैन हैं मतदाता... 
 
मुद्दों से दूरी : इस चुनाव चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, सभी दलों ने मुद्दों से दूरी बनाकर रखी है। उम्मीदवारों की दिलचस्पी मुद्दों से ज्यादा चुनावी हथकंडों में है। प्रमुख दलों के कई उम्मीदवारों को तो पार्टी के घोषणापत्र के बारे में ही ज्यादा पता नहीं है। सभी प्रत्याशी चुनाव तो जीतना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें साम, दाम, दंड और भेद की नीति से कोई गुरेज नहीं है। जनहित से उनका दूर-दूर तक सरोकार नजर नहीं आ रहा है। 
 
आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति : एक तरफ चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को यकीन है कि एक-दूसरे पर कीचड़ उछालकर, प्रतिद्वंद्वी को जनता के बीच बदनाम कर आसानी से चुनाव जीता जा सकता है। दूसरी ओर जनता इस बात से चिंतित है कि इस कदर गिरे हुए नेताओं से उम्मीद क्या रखें। चुनाव मैदान में इस तरह की बात की जा रही है तो विधायक बनने के बाद वह क्या गुल खिलाएंगे। 
  
कब आएंगे प्रत्याशी : जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, उन इलाकों के लोगों की धड़कनें भी बढ़ती जा रही हैं, जहां प्रत्याशी अभी तक प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। लोगों को यह चिंता सता रही है कि अगर प्रत्याशी चुनाव प्रचार के लिए ही नहीं आए तो वे वोट किसे देंगे। अभी जरूरत के समय नेताओं का यह हाल है तो चुनाव बाद क्या होगा?
 
प्रलोभन की राजनीति : चुनावी समर में उतरे नेताओं के लिए मतदाताओं को रिझाना बेहद जरूरी है। इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। कई बार लोगों को बड़े-बड़े प्रलोभन दिए जाते हैं। कई बार छुटभैये नेता उनके वोट के नाम पर मोटी रकम भी वसूल कर लेते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता। ऐसे में कई बार ईमानदार मतदाता को ठगा हुआ महसूस करते हैं। 
 
विकल्प का अभाव : हर बार की तरह इस चुनाव में भी उम्मीदवारों की भीड़ के बीच मतदाताओं को विकल्प का अभाव नजर आ रहा है। ऐसे में उन्हें अपने क्षेत्र की चिंता सता रही है और उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि किसे और क्यों वोट देना है।
 
बहरहाल इन चिंताओं के बीच भी मतदाता चुनाव को लेकर खासे उत्साहित हैं। चुनाव आयोग की तैयारियों और मतदाओं के इसी उत्साह ने एक बार फिर रिकॉर्ड मतदान की उम्मीद जगा दी है।     
लेखक के बारे में
नृपेंद्र गुप्ता
नृपेंद्र गुप्ता पिछले 21 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत हैं।   अनुभव : नृपेंद्र गुप्ता 2 दशक से ज्यादा समय से प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में कार्य.... और पढ़ें

Show comments

Tata की इस कार पर 3 लाख से ज्यादा डिस्काउंट, पुरानी गाड़ियों पर मिल रहा बड़ा फायदा, Harrier EV भी सस्ती

China : लद्दाख को लेकर चीन की कुटिल करतूत, बताया भारत का अवैध कब्जा, 28 जगहों के नाम बदलने पर भड़का

Electric Scooter : सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ रोजाना का सफर होगा आसान, मिलेगी 130 KM की रेंज, जान लीजिए दूसरे फीचर्स

Vande Bharat Sleeper Train : अब 24 कोच वाली ट्रेन में होगा सफर, 1,224 यात्रियों को मिलेगी जगह, जानिए हॉट शॉवर और पैंट्री समेत सभी सुविधाएं

एस. जयशंकर ने क्यों दी '4F संकट' की चेतावनी? जानिए इंदिरा गांधी ने 1966 में भारत को ऐसे ही संकट से कैसे निकाला था

सभी देखें

MP में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सुखबीर सिंह बने CM के प्रमुख सचिव, कई जिलों के कलेक्टर बदले

गर्भवती पत्रकार ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप, मेरा हाथ पकड़ा, मुझे धक्का दिया

2029 में फिर करारी हार के लिए रहें तैयार, अमित शाह की राहुल गांधी को चुनौती, SIR विरोध पर भी साधा निशाना

बिहार के हाजीपुर में गंगा नदी में पलटी नाव, 11 की मौत, 15 से 20 लोग सवार थे

Mamata Banerjee : ममता बनर्जी पर हमले की कोशिश, TMC का दावा- चाकू छिपाकर लाई थी महिला

अगला लेख