Hanuman Chalisa

भगवान महावीर स्वामी के जन्म की 5 खास बातें

Updated: शनिवार, 4 अप्रैल 2020 (18:35 IST)
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने 'कैवल्य ज्ञान' की जिस ऊंचाई को छुआ था वह अतुलनीय है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के विरोधाभास को नहीं रहने देते हैं। आओ जानते हैं उनके जन्म की 5 खास बातें।
 
 
1.जन्म समय : भगवान महावीर का जन्म 27 मार्च 598 ई.पू. अर्थात 2610 वर्ष पहले हुआ था। उस वक्त चैत्र माह की शुक्ल त्रयोदशी थी। गर्भ तिथि अषाड़ शुक्ल षष्ठी (शुक्रवार 17 ई.पू. 599) और गर्भकाल 9 माह 7 दिन 12 घंटे।
 
 
2.जन्म स्थान : वैशाली गणतंत्र के कुंडलपुर में उनका जन्म हुआ था। कुंडलपुर बिहार के नालंदा जिले में स्थित है। यह स्थान पटना से यह 100 ‍किलोमीटर और बिहार शरीफ से मात्र 15 किलोमीटर दूर है। इस स्थान को जैन धर्म में कल्याणक क्षेत्र माना जाता है। भगवान महावीर ने 72 वर्ष की अवस्था में ईसापूर्व 527 में पावापुरी (बिहार) में कार्तिक (आश्विन) कृष्ण अमावस्या को निर्वाण प्राप्त किया। इनके निर्वाण दिवस पर घर-घर दीपक जलाकर दीपावली मनाई जाती है।
 
 
3. माता पिता : उनके पिता कुंडलपुर के राजा थे जिनका नाम सिद्धार्थ था। उनकी माता त्रिशला (प्रियकारिणी) लिच्छवि राजा चेटकी की पुत्र थीं। वे अपने माता पिता की तीसरी संतान थे। वर्धमान के बड़े भाई का नाम था नंदीवर्धन व बहन का नाम था सुदर्शना। उनका जन्म नाम वर्धमान है। राजकुमार वर्धमान के माता-पिता श्रमण धर्म के पार्श्वनाथ सम्प्रदाय से थे। महावीर को 'वीर', 'अतिवीर' और 'सन्मति' भी कहा जाता है। 

 
4.जन्म कुल : महावीर स्वामी जंत्रिक कुल से संबंधित थे। उनका वर्ण क्षत्रिया था।

 
5.महावीर के 34 भव (जन्म) : 1.पुरुरवा भील, 2.पहले स्वर्ग में देव, 3.भरत पुत्र मरीच, 4.पांचवें स्वर्ग में देव, 5.जटिल ब्राह्मण, 6.पहले स्वर्ग में देव, 7.पुष्यमित्र ब्राह्मण, 8.पहले स्वर्ग में देव, 9.अग्निसम ब्राह्मण, 10.तीसरे स्वर्ग में देव, 11.अग्निमित्र ब्राह्मण, 12.चौथे स्वर्ग में देव, 13.भारद्वाज ब्राह्मण, 14.चौथे स्वर्ग में देव, 15. मनुष्य (नरकनिगोदआदि भव), 16.स्थावर ब्राह्मण, 17.चौथे स्वर्ग में देव, 18.विश्वनंदी, 19.दसवें स्वर्ग में देव, 20.त्रिपृष्‍ठ नारायण, 21.सातवें नरक में, 22.सिंह, 23.पहले नरक में, 24.सिंह, 25.पहले स्वर्ग में, 26.कनकोज्जबल विद्याधर, 27.सातवें स्वर्ग में, 28.हरिषेण राजा, 29.दसवें स्वर्ग में, 30.चक्रवर्ती प्रियमित्र, 31.बारहवें स्वर्ग में, 32.राजा नंद, 33.सोलहवें स्वर्ग में, 34.तीर्थंकर महावीर।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

जैन धर्म में क्या है चातुर्मास का महत्व?

26 July Birthday: आपको 26 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 26 जुलाई 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

विजया पार्वती व्रत के दिन क्या करते हैं क्या है इसका महत्व और कथा

Weekly Horoscope: 27 जुलाई से 2 अगस्त 2026 का साप्ताहिक राशिफल, जानें किस राशि के खुलेंगे भाग्य

अगला लेख