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कोरोनाकाल : विपरीत परिस्थिति में ही होती है योग्यता की परीक्षा, जानिए महाभारत का ज्ञान

Updated: सोमवार, 18 जनवरी 2021 (11:50 IST)
विपरीत परिस्थिति अर्थात संकट का समय। ऐसा समय जो आपके समर्थन में नहीं है या संकटकाल है। संकट के समय ही यह सिद्ध करने का होता है कि आप योग्य हो, काबिल हो और सर्वेश्रेष्ठ हो। संकट चाहे खुद पर आया हो, परिवार पर, मित्र पर आया हो या आपके संस्थान पर आपको उस समय ही डटकर मुकाबला करना होता है। संकट के समय पलायन करने या हथियार डाल देने से धर्म का भी त्याग हो जाता है। ऐसे समय महाभारत की ये 5 बातें ध्यान रखना जरूरी है।
 
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1. विनम्र बने रहें : पांच पांडवों में सबसे ज्यादा मानसिक नियंत्रण युधिष्ठिर और फिर अर्जुन के पास था। श्रीकृष्ण की शिक्षा के तहत यह दोनों संयम से निर्णय लेकर विपरीत परिस्थिति में भी विनम्र बने रहे। उन्होंने कभी की धृतराष्ट्र को भला-बुरा नहीं कहा और अंत तक उनका सम्मान ही किया। हर जगह पर विनम्रता से ही अपना पक्ष रखा।

दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण हर तरह से शक्तिशाली थे लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं किया। वे अपने गुरु, माता पिता और बड़े भाई के साथ ही अपने से बड़े पुरुषों का आदर करते और उनका चरण स्पर्श करते थे। जो लोग अपने माता-पिता व गुरु का आदर करते हैं, वे प्रशंसा के पात्र बनते हैं। इसलिए सदैव बड़ों के आदर व सम्मान में हमेशा आगे रहना चाहिए।
 
 
2. धर्म का साथ मत छोड़ों : जीवन में कितनी ही कठिनाइयां आए लेकिन आप धर्म का साथ न छोड़ें, क्योंकि हो सकता है कि अधर्म के साथ रहकर आप तात्कालिक लाभ प्राप्त कर सकते हो लेकिन जीवन के किसी भी मोड़ पर आपको इसका भुगतान करना ही होगा। क्योंकि श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं हे अर्जुन तुझे देखने वाले आकाश में देवता भी है और राक्षस भी। लेकिन तू खुद को देख और समझ। खुद के समक्ष धर्मपरायण बन। यदि तू धर्म की रक्षा करेगा तो धर्म तेरी रक्षा करेगा।
 
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3. तुम जो मानते हो वह महत्वपूर्ण है : व्यक्ति क्या है यह महत्वपूर्ण नहीं परंतु व्यक्ति में क्या है यह महत्वपूर्ण है। तुम जो सोचते हो या जो कहते हो वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना की तुम जो मानते हो। अपनी मान्यता या धारणा पर ध्यान दो। गलत मान्यता या धारणों का त्याग कर दो, क्योंकि तुम्हारे मानने से ही तुम्हारा भविष्य निर्मित होता है।
 
4. संकट का सामना करो : संकट उसी व्यक्ति के समक्ष खड़े होते हैं जो उनका हल जानता है। सफलता का रास्ता आपके खिलाफ खड़ा किया गया विरोध और संकट ही बनाता है। अर्जुन सबसे योग्य धनुर्धर था तभी तो उसके समक्ष कई चुनौतियां खड़ी की गई थी। 
 
5. समस्या का समाधान ढूंढना : कहते हैं कि जब बुरा हो तो हमें उससे एकदम से लड़ने के बजाय उसे समझकर उसका समाधान खोजना चाहिए और तब ही पराक्रम करना चाहिए। पांडवों के समक्ष कई तरह के संकट खड़े हुए, जैसे भीष्म पितामह और द्रोणराचार्य को मारना नामुमकीन था और इससे भी कठिन कार्य था जयद्रथ का वध करना, क्योंकि उसका वध करने वाले का स्वत: ही वध होने का उसे वरदान था। परंतु सभी तरह की समस्याओं का समाधान ढूंढा गया और तब उस पर कार्य किया गया। तो जरूरी है कि समस्याओं पर चिंता करने के बजाय उसे पर चिंतन करना।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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