खंडवा से शेरा की पत्नी के बजाय राजनारायण सिंह को प्राथमिकता पर रखा कमलनाथ ने

Author अरविन्द तिवारी| पुनः संशोधित सोमवार, 4 अक्टूबर 2021 (21:31 IST)
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केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे के में कांग्रेस के टिकट की दौड़ से बाहर होने के बाद अब निमाड़ खेड़ी से दो बार कांग्रेस विधायक रहे पुरणी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी प्राथमिकता पर रखा है।

राजनारायण सिंह कमलनाथ के कट्टर समर्थक हैं और दो बार उन्हीं के बलबूते पर टिकट लाकर विधायक बने थे।
हालांकि उनके बेटे उत्तम पाल को कुछ महीने पहले हुए उपचुनाव में मांधाता विधानसभा क्षेत्र से करारी शिकस्त का सामना करना पडा था।


अरुण यादव द्वारा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के बाद यह माना जा रहा था कि बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा की पत्नी जयश्री ठाकुर यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकती है।

कांग्रेस की राजनीति में शेरा को भी कमलनाथ का ही समर्थक माना जाता है और जब शेरा ने यहां से अरुण यादव की उम्मीदवारी की मुखालफत की थी तब उन्होंने यह भी कहा था कि कमलनाथ ने जो सर्वे करवाया है, उसमें उनकी पत्नी का नाम अरुण यादव से बेहतर माना गया है। शेरा ने यह भी कहा था कि यदि कांग्रेस ने अरुण यादव को टिकट दिया तो उनकी पत्नी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में रहेंगे।
पार्टी में भारी खींचतान के चलते अब अरुण यादव ने तो खुद को उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद जयश्री ठाकुर की राह आसान नहीं दिख रही है।


कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक रविवार शाम दिल्ली रवाना होने के पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने शेरा को यह संकेत दे दिए हैं कि खंडवा से उनकी पत्नी की उम्मीदवारी संभव नहीं है।
खंडवा सीट के लिए कमलनाथ ने पहली प्राथमिकता पर आप राज नारायण सिंह का नाम रखा है इसके अलावा एक और नाम बड़वाह के विधायक सचिन बिरला का है क्योंकि सचिन 2 दिन पहले भोपाल में उम्मीदवारी को लेकर अनिच्छा जता चुके हैं ऐसी स्थिति में यहां से राज नारायण सिंह के नाम पर ही स्वीकृति की मुहर लगती नजर आ रही है।

कमलनाथ की एक कोशिश खंडवा क्षेत्र में आदिवासी मतों के समीकरण को देखते हुए भीकनगांव की विधायक झूमा सोलंकी को भी मैदान में लाने की थी, लेकिन झूमा ने भी चुनाव लड़ने से स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया।

इधर खुद चुनाव लड़ने से इनकार करने वाले अरुण यादव ने यहां से सुनीता सकरगाये और नरेंद्र पटेल के नाम आगे बढ़ाए थे, लेकिन पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने इन्हें कोई तवज्जो नहीं दी।



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