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  4. Five major reasons for the BJP's defeat in the Datia by-election.

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के पांच बड़े कारण, कांग्रेस के घनश्याम सिंह की बड़ी जीत

Datia by-election results
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर ली है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हरा दिया है 15वें राउंड की मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम ने तीसरे राउंड से जो बढ़त बनाई और वह आखिरी में एक बड़ी जीत में बदल गई है। मध्यप्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट माने जाने वाली दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के आखिरी क्या कराण थे इसको लेकर अब सियासी गलियारों में  चर्चा तेज हो गई है। मध्यप्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट माने जाने वाली दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के आखिरी क्या कराण थे इसको लेकर अब सियासी गलियारों में  चर्चा तेज हो गई है।

1-भाजपा की रणनीतिक चूक, नरोत्तम की जगह आशुतोष को टिकट देना-दतिया उपचुनाव में भाजपा ने जिस तरह से अपने कद्दवार नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर नए चेहरे आशुतोष तिवारी को टिकट दिया वह चुनाव में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण साबित हुई। नरोत्तम मिश्रा जो 2008 में पहली बार दतिया विधानसभा सीट से चुनाव जीते और लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहे वह उपचुनाव में भाजपा की तरह से टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन उपचुनाव की तारीखों के एलान के बाद भाजपा आलाकमान ने नरो्त्तम मिश्रा का टिकट काट कर सीधे नए चेहरे आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतार दिया।

नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद इसका रिएक्शन भी देखा गया और पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित सभी स्थानीय पदाधिकारियों ने एक झटके में इस्तीफा दे दिया और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने 48 घंटे तक दतिया में जमकर बवाल काटा। इसका चुनाव मे साइड इफेक्ट देखने को मिला और  पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का कोर कार्यकर्ता घर बैठ गए और इसका नुकसान भाजपा को  चुनाव में उठाना पड़ा।  

2-उपचुनाव में भाजपा में भितरघात-दतिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ भाजपा के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के  विरोध में काम किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया विधानसभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्टिग की तो नाम न छापने की शर्त पर कई स्थानीय भाजपा नेताओं ने साफ कहा कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट गलत तरीके से टिकट काटा गया और इससे पार्टी का कोर कार्यकर्ता बिल्कुल खुश नहीं है।

दतिया के स्थानीय भाजपा नेता पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक दौरान खमोश रहे। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के भीतर पूरी तरह एकजुटता नहीं दिखी। कई क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही, जिसका असर मतदान पर पड़ा। सोमवार को  जिस तरह से  चुनावी परिणाम आए है उसमें भाजपा को शहर के पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि उपचुनाव में भाजपा को भितरघात का सामना करना पड़ा।

3-आशुतोष तिवारी दतिया में बाहरी चेहरा?-दतिया में भाजपा ने भांडेर से आने वाले आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाय था। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को दतिया का अपना स्थानीय चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन दतिया की जनता ने आशुतोष तिवारी को स्वीकार नहीं किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया के स्थानीय लोगों से बात की  थी तो लोगों ने साफ कहा था कि आशुतोष तिवारी को उन्होंने कभी नहीं देखा और वह अचानक से चुनाव लड़ने आ गए। दरअसल आशुतोष तिवारी संगठन में लबे समय से सक्रिय थे और वह पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। ऐसे में वह दतिया की जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाए।

वहीं घनश्याम सिंह जो पहले भी दो बार दतिया से विधायक चुने जा चुके थे उनको स्थानीय चेहरा माना गया और स्थानीय और बाहरी के मुद्दे को लगातार चुनाव में उठाया। स्थानीय बनाम बाहरी की बहस चुनाव प्रचार के दौरान भी सुनाई देती रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने भी चुनाव में असर डाला और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

4-कांग्रेस की बेहतर चुनावी रणनीति और मैनेजमेंट-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया और विधानसभा क्लस्टर में बांटकर जिस तरह से चुनाव लड़ा वह उसकी जीत का बड़ा कारण रहा। भाजपा की तुलना में कांग्रेस ने उचुनाव में बेहतर चुनावी प्रबंधन का प्रदर्शन किया। बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय और मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाने की रणनीति कांग्रेस के पक्ष में जाती दिखाई दी। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जिस तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दतिया में डेरा डाले रख कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ पोलिंग बूथ मैनेजमेंट किया वह कांग्रेस की प्रचंड जीत का बडा कारण साबित हुआ।

5-कांग्रेस की एकजुटता-दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया वह उसकी जीत का बड़ा कराण साबित हुई। कांग्रेस ने चुनाव के अंतिम दौर तक जिस तरह से नाराज नेताओं अवधेश नायक और राजेंद्र भारती को साध कर रखा, वह जीत का एक बड़ा कारण साबित हुई। चुनाव के दौरान अधिकांश वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर नजर आए और उम्मीदवार के समर्थन में एकजुट होकर प्रचार किया। इस एकजुटता का लाभ कांग्रेस को सीधा मिला।
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भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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