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ड्रैगन का 'परमाणु सीक्रेट' बेनकाब! सच निकला अमेरिका का दावा, भारत के लिए भी खतरे की घं

China Nuclear Silo
China Nuclear Silo: ड्रैगन यानी चीन के जिस 'परमाणु सीक्रेट' पर अमेरिका सालों से कह रहा था, आखिरकार चीन ने खुद उस पर मुहर लगा दी है। अब तक जिन रहस्यमयी ठिकानों को चीन पवन ऊर्जा (विंड फार्म) की जगह बताता आ रहा था, वे असल में जमीन के नीचे बने परमाणु मिसाइलों के घातक 'साइलो' (Silos) निकले। चीन के सरकारी टीवी पर आई एक डॉक्यूमेंट्री में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के अधिकारी ने पहली बार कबूला है कि उन्होंने युद्ध के लिए चीन के रणनीतिक 'तुरुप के इक्के' तैयार कर लिए हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि इनमें से कुछ ठिकाने भारतीय सीमा के बेहद करीब हैं। इससे पहले भी इस तरह के दावे किए जाते रहे हैं। 

पेंटागन के दावे पर लगी मुहर

साल 2021 से ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से चीन के इस गुप्त प्लान का दावा कर रहे थे। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने उत्तर-पश्चिमी इलाकों में 300 से ज्यादा भूमिगत मिसाइल साइलो तैयार कर लिए हैं। ये साइलो शिनजियांग के हामी, गांसू के यूमेन और इनर मंगोलिया के यूलिन में बनाए गए हैं। अब तक इसे नकारने वाला चीन अब खुलकर अपने सरकारी टीवी CCTV पर इन ठिकानों का महिमामंडन कर रहा है। कुछ समय पहले रायटर ने भी दावा किया था कि चीन अपने परमाणु मिसाइल साइलो के पास लॉन्च पैड बना रहा है।
 
कुछ समय पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन के एक दूर-दराज रेगिस्तान में एक बड़ा मिलिट्री कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। कुछ सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे इस तरह बनाया गया है ताकि अगर अमेरिका चीन के न्यूक्लियर हथियारों पर पहले हमला करे, तो भी बीजिंग की जवाबी हमला करने की क्षमता खत्म न हो।

80 से ज्यादा लॉन्चपैड 

दरअसल, चीन की न्यूक्लियर मिसाइलें पहले से ही अमेरिका के किसी भी शहर तक पहुंच सकती हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बीजिंग उन अलग-थलग न्यूक्लियर साइलो (मिसाइल रखने की जगह) के पास लॉन्च पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नोड्स का एक बड़ा नेटवर्क बना रहा है, जहां चीन की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें रखी हैं।  चीन ने अपने दूर-दराज़ उत्तर-पश्चिम इलाके में, हामि न्यूक्लियर साइलो फील्ड के पास 80 से ज्यादा लॉन्च पैड और अष्टकोणीय आकार के तीन इंस्टॉलेशन बनाए हैं।
 
 
डॉक्यूमेंट्री में PLA रॉकेट फोर्स के इंजीनियरिंग अधिकारी कुई दाओहू ने बताया कि हम मिसाइलों के लिए घर (साइलो) बनाते हैं। जितनी जल्दी साइलो तैयार होता है, उतनी ही तेजी से वहां मिसाइलें तैनात होकर युद्ध के लिए तैयार हो जाती हैं। हालांकि यह काम आसान नहीं था, लेकिन हमारी टीम ने इसे तय समय पर पूरा कर दिखाया।

पूरी दुनिया को तबाह करने की ताकत

हालांकि चीन ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि इन साइलो में कौन सी मिसाइलें रखी गई हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें DF-5C इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के लिए बनाया गया है। यह मिसाइल दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते ही तबाही मचा सकती है। ये भूमिगत साइलो इतने मजबूत बनाए गए हैं कि दुश्मन के परमाणु हमले को झेलकर तुरंत भीषण जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।

भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

चीन के ये परमाणु ठिकाने भारत की सीमाओं से ज्यादा दूर नहीं हैं। गांसू स्थित साइलो भारत के अरुणाचल प्रदेश से महज 1100 किलोमीटर की दूरी पर है। शिनजियांग के हामी में बना ठिकाना लेह से सिर्फ 1600 किलोमीटर दूर है। चीन के इस खुलासे के बाद एशिया में सामरिक संतुलन को लेकर एक बार फिर हड़कंप मच गया है।
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