ग्वालियर में ढहा सिंधिया का किला, जेपी नड्डा की ससुराल जबलपुर में हारी भाजपा,छिंदवाड़ा में 22 साल बाद कांग्रेस का महापौर

Author विकास सिंह| Last Updated: रविवार, 17 जुलाई 2022 (19:48 IST)
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भोपाल। में नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम विपक्षी दल के लिए काफी सुखद है। 11 नगर निगमों में से कांग्रेस 3 नगर निगमों में जीत हासिल की है। कांग्रेस ने भाजपा को चौंकाते हुए नगर निगम पर अपना कब्जा जमाया है। वहीं के गढ़ छिंदवाड़ा में 22 साल बाद कांग्रेस का महापौर ने जीत हासिल की है। इसके साथ में सिंधिया फैक्टर को दरकिनार कर कांग्रेस ने महापौर पद पर अपना कब्जा जमाया है।

जबलपुर में कांग्रेस के महापौर उम्मीदवार जगत बहादुर अन्नू ने भाजपा के प्रत्याशी जितेंद्र जामदार को 50 हजार के बड़े अंतर से हराया। जबलपुर में 23 साल बाद कांग्रेस के जगत बहादुर सिंह अन्नू महापौर बनेंगे।



गौरतलब है कि जबलपुर भाजपा का गढ़ माना जाता है और में भाजपा ने संघ से आने वाले सीनियर नेता जितेंद्र जामदार को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं जबलपुर भाजपा के राष्ट्रीय नड्डा के ससुराल भी है और नगर निगम चुनाव से ठीक पहले जेपी नड्डा दो दिन जबलपुर में रूक कर पार्टी नेताओं की बैठक के साथ बड़ी रैली को भी संबोधित किया था।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा नगर निगम में 22 साल बाद कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया है। छिंदवाड़ा में कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी विक्रम अहाके ने 3 हजार 547 वोटों से जीत हासिल की है। इसके साथ 32 साल के विक्रम अहाके प्रदेश के सबसे युवा महापौर बन गए है। इसके साथ छिंदवाड़ा में नगर निगम परिषद में भी कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया है।

छिंदवाड़ा में कांग्रेस की जीत पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा की छिंदवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी विक्रम आहाके ने शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस प्रत्याशी को दिए इस भारी जनसमर्थन के लिए मैं छिंदवाड़ा की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। छिंदवाड़ा की जनता ने बदलाव की शुरुआत कर दी है, 2023 में पूरा प्रदेश बदल जाएगा।

वहीं नगर निगम चुनाव में ग्वालियर के परिणाम काफी चौंकाने वाले रहे। ग्वालियर में कांग्रेस प्रत्याशी शोभा सिकरवार ने भाजपा की प्रत्याशी सुमन शर्मा पर निर्णायक बढ़त बना ली है। शोभा सिकरवार की जीत तय है। इसके साथ ग्वालियर नगर निगम के कुल 66 वार्ड में से कांग्रेस पार्षदों ने बड़ी संख्या में जीत हासिल की है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने के बाद पहले चुनाव में भाजपा की हार को बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है।



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