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बड़वानी में Gen अल्फा छात्रों का प्रोटेस्‍ट, 50 KM पैदल चलकर NH-3 किया जाम, ये थी आंदोलन की वजह

Updated: सोमवार, 24 अगस्त 2026 (16:31 IST)
मध्‍यप्रदेश के बड़वानी जिले में जामली एकलव्य स्कूल के 200 छात्र-छात्राएं सुबह 7 बजे 70 KM दूर कलेक्टर से मिलने पैदल निकल पड़े। उन्‍होंने आगरा-मुंबई नेशनल हाई-वे-3 (NH-3) जाम कर दिया। वे रोड पर ही जमकर बैठ गए। प्रशासन ने उन्‍हें काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जिद थी कि कलेक्टर को ही मौके पर बुलाओ, वे अपनी समस्‍याएं कलेक्‍टर को ही बताएंगे।

उन्होंने बड़वानी जिले में आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे जाम कर दिया और रोड पर प्रदर्शन करने बैठ गए। वह बड़वानी के कलेक्टर को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गए। उनका कहना था कि वह कलेक्टर को ही अपनी मांगों के बारे में बताएंगे। इस दौरान हाईवे पर जाम से यातायात प्रभावित हो गया। मौके पर पुलिस और प्रशासन भी पहुंच गया, जिन्होंने बच्चों को समझाकर जाम खुलवाया।

क्‍या मांग थी बच्‍चों की : दरअसल, जामली स्थित एकलव्य स्कूल के छात्र-छात्राएं 70 किमी दूर बड़वानी कलेक्टर से मिलने निकल पड़े और मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे 3 से होते हुए पैदल चलने लगे। आरोप है कि छात्रावास में अपशब्द और अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही कहना है कि उन्हें परिजनों से भी नहीं मिलने दिया जाता है।

अधिकारी मनाते रहे लेकिन नहीं माने : सूचना मिलते ही एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, एकलव्य स्कूल के प्राचार्य और पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वह काफी देर तक नहीं माने। फिर मजबूरन प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को उनके साथ-साथ पैदल चलना पड़ा और वह उन्हें मनाते रहे। उनकी मांग थी कि वह कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याओं का हल निकलवाएंगे। छात्र-छात्राएं लगभग जामली स्थित एकलव्य स्कूल से लगभग दूर तक कई किमी तक पैदल चले। करीब 200 की संख्या में विद्यार्थी सुबह 7 बजे ही निकल गए थे. उन्होंने 50 किमी से ज्यादा पैदल सफर तय किया। इस बीच एसडीएम ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन वह अड़े रहे कि कलेक्टर से ही बात करेंगे।

चक्कर खाकर गिरे तो एंबुलेंस आई : इस दौरान कई छात्राओं को चक्कर भी आए गए तो मौके पर एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें अस्पताल भेजा। जब सूचना मिली तो जिला मुख्यालय से अपर कलेक्टर रवाना हो गए. उन्होंने छात्रों को समझाया और उनकी समस्याएं सुनीं। स्टूडेंट्स का कहना है कि हॉस्टल में जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। परिजन आते हैं तो उनसे मिलने नहीं दिया जाता है। अगर भाई आता है तो उसे भी अलग नजरिए से देखा जाता है। छात्राओं के चरित्र पर भी उंगली उठाई जाती है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं भी नहीं दी जाती है। साथ ही परिजनों से मिलने और छात्रावास की शिकायत न करने का भी दबाव बनाया जाता है।

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