'पाँव छूकर पाप धोना चाहते हैं लालू'
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से बातचीत
विनोद बंधु
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गफलत में हैं कि ब्राह्मणों के प्रतीकात्मक पाँव छूने से लोग उनकी पिछली करतूतों को भूल जाएँगे।
नीतिश ने कहा कि लालूजी पाँव छूकर अपना पिछला पाप धोना चाहते हैं, लेकिन लोग पुरानी बातों को इतनी आसानी से नहीं भूलेंगे। लोगों को अच्छी तरह से याद है कि किस तरह बिहार में सामाजिक तनाव पैदा किया गया था।
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि अमन-चैन को कौन खोना चाहेगा। राजद के राजपाट में सुबह जब घर के लोग बाहर निकलते थे तो शाम को लौटने तक चिंता बनी रहती थी। महिलाएँ सड़क पर निकलने में डरती थीं।
हमारा रास्ता आसान : यह पूछने पर कि राजद, लोजपा और सपा ने साझा मंच बना लिया है, इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा? नीतिश ने कहा कि बिहार में लड़ाई शुरू होने से पहले ही बिखर गई है।
सिर्फ बिहार में ही नहीं तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश में भी उसकी यही स्थिति है। ज्यादा सीटों पर लड़ने के चक्कर में यूपीए के सहयोगी दल आपस में ही लड़ पड़े। इससे हमारा रास्ता और आसान हो गया है। इनका गठजोड़ महज अवसरवादी था। ये सिर्फ सत्ता के लिए कहीं भी चले जाएँगे। ज्यादा सीटों पर लड़ने के चक्कर में आपस में ही लड़ पड़े।
यह पूछने पर कि लालू कह रहे हैं कि बिहार में सबसे बड़ा निवेशक रेलवे है? इस पर उन्होंने कहा कि एक काम किया हो बताएँ। पटना-सोनपुर, मुंगेर, कोसी रेल पुल और पटना-गया रेल लाइन दोहरीकरण जैसी अनेक महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाएँ कहाँ अटक गईं। हरनोत के रेल कारखाने को लटका दिया।
उन्होंने कहा कि जब रेलवे अकूत कमाई कर रहा था तो इन परियोजनाओं के लिए पैसे क्यों नहीं दिए गए। वे सिर्फ शिलान्यास करते रहे। आज रेलयात्रियों से पूछिए तो वे बताएँगे कि वे कैसे मैनेजमेंट गुरु हैं।
यह पूछने पर कि टिकट वितरण का दौर शुरू होते ही जद (यू) में बवंडर मच गया। ऐसा क्यों हुआ? कुमार ने कहा कि किसे है इसकी परवाह। कौन लोग हैं, जो यह सब कर रहे हैं।
दिग्विजयसिंह डेढ़ साल से जॉर्ज फर्नांडीस से मिलने तक नहीं गए। अब उनके प्रति प्यार उमड़ आया है। रामजीवनसिंह पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय नहीं थे और न चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। जगन्नाथ मिश्र कोसी की बाढ़ के समय ही संसदीय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुके थे।
उन्होंने उस संकट के समय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। फिर भी वे लड़ना चाहते थे तो अपनी इच्छा जाहिर करते। जब संन्यास की घोषणा कर चुके थे तो फिर वे किसके लिए टिकट चाहते थे।
केंद्र से पैसे नहीं मिले : उन्होंने कहा कि तेजी के साथ विकास और केंद्र का भेदभाव मुख्य मुद्दा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव हमें करना पड़ रहा है। तीन वर्षों में इस पर सवा सात सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। कोसी के जलप्रलय और इससे पिछले साल की बाढ़ का हमने सामना किया, लेकिन केंद्र से पैसे नहीं मिले। कोसी पीड़ितों के पुनर्वास के प्रस्ताव पर छः महीने में कोई फैसला नहीं किया गया।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गफलत में हैं कि ब्राह्मणों के प्रतीकात्मक पाँव छूने से लोग उनकी पिछली करतूतों को भूल जाएँगे।
नीतिश ने कहा कि लालूजी पाँव छूकर अपना पिछला पाप धोना चाहते हैं, लेकिन लोग पुरानी बातों को इतनी आसानी से नहीं भूलेंगे। लोगों को अच्छी तरह से याद है कि किस तरह बिहार में सामाजिक तनाव पैदा किया गया था।
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि अमन-चैन को कौन खोना चाहेगा। राजद के राजपाट में सुबह जब घर के लोग बाहर निकलते थे तो शाम को लौटने तक चिंता बनी रहती थी। महिलाएँ सड़क पर निकलने में डरती थीं।
हमारा रास्ता आसान : यह पूछने पर कि राजद, लोजपा और सपा ने साझा मंच बना लिया है, इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा? नीतिश ने कहा कि बिहार में लड़ाई शुरू होने से पहले ही बिखर गई है।
सिर्फ बिहार में ही नहीं तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश में भी उसकी यही स्थिति है। ज्यादा सीटों पर लड़ने के चक्कर में यूपीए के सहयोगी दल आपस में ही लड़ पड़े। इससे हमारा रास्ता और आसान हो गया है। इनका गठजोड़ महज अवसरवादी था। ये सिर्फ सत्ता के लिए कहीं भी चले जाएँगे। ज्यादा सीटों पर लड़ने के चक्कर में आपस में ही लड़ पड़े।
यह पूछने पर कि लालू कह रहे हैं कि बिहार में सबसे बड़ा निवेशक रेलवे है? इस पर उन्होंने कहा कि एक काम किया हो बताएँ। पटना-सोनपुर, मुंगेर, कोसी रेल पुल और पटना-गया रेल लाइन दोहरीकरण जैसी अनेक महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाएँ कहाँ अटक गईं। हरनोत के रेल कारखाने को लटका दिया।
उन्होंने कहा कि जब रेलवे अकूत कमाई कर रहा था तो इन परियोजनाओं के लिए पैसे क्यों नहीं दिए गए। वे सिर्फ शिलान्यास करते रहे। आज रेलयात्रियों से पूछिए तो वे बताएँगे कि वे कैसे मैनेजमेंट गुरु हैं।
यह पूछने पर कि टिकट वितरण का दौर शुरू होते ही जद (यू) में बवंडर मच गया। ऐसा क्यों हुआ? कुमार ने कहा कि किसे है इसकी परवाह। कौन लोग हैं, जो यह सब कर रहे हैं।
दिग्विजयसिंह डेढ़ साल से जॉर्ज फर्नांडीस से मिलने तक नहीं गए। अब उनके प्रति प्यार उमड़ आया है। रामजीवनसिंह पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय नहीं थे और न चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। जगन्नाथ मिश्र कोसी की बाढ़ के समय ही संसदीय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुके थे।
उन्होंने उस संकट के समय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। फिर भी वे लड़ना चाहते थे तो अपनी इच्छा जाहिर करते। जब संन्यास की घोषणा कर चुके थे तो फिर वे किसके लिए टिकट चाहते थे।
केंद्र से पैसे नहीं मिले : उन्होंने कहा कि तेजी के साथ विकास और केंद्र का भेदभाव मुख्य मुद्दा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव हमें करना पड़ रहा है। तीन वर्षों में इस पर सवा सात सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। कोसी के जलप्रलय और इससे पिछले साल की बाढ़ का हमने सामना किया, लेकिन केंद्र से पैसे नहीं मिले। कोसी पीड़ितों के पुनर्वास के प्रस्ताव पर छः महीने में कोई फैसला नहीं किया गया।

