कांग्रेस के संकटमोचक आजाद

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 23 मई 2009 (18:30 IST)
कांग्रेस पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिसकी शुरुआत 1973 में जम्मू-कश्मीर में बाहलेसा की पार्टी इकाई के ब्लॉक सचिव के रूप में हुई।

जम्मू-कश्मीर के इस नेता का मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना अपेक्षित था। वे कांग्रेस के रिकॉर्ड नौ बार महासचिव रह चुके हैं और 18 साल कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य रहे। पार्टी के वर्तमान पीढ़ी के नेताओं में इस पद पर सबसे लंबी पारी उन्होंने खेली।

आजाद कांग्रेस की हर सरकार में अस्सी के दशक से ही जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे 31 साल की उम्र में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अल्पसंख्यक समुदाय के पहले अध्यक्ष बने।
महाराष्ट्र की वाशिम सीट से 1980 में लोकसभा पहुँचने वाले आजाद को 1982 में कानून एवं कंपनी मामलों का प्रभारी राज्यमंत्री बनाया गया था।

आजाद कांग्रेस की विभिन्न सरकारों में रहे और संसदीय कार्य मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कामकाज संभाला। वे नागर विमानन और सूचना प्रसारण मंत्रालयों में भी रहे। आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
आजाद ने मुख्यमंत्री पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि विश्वास मत जीतने के लिए वे खरीद-फरोख्त नहीं करेंगे।-भाषा




और भी पढ़ें :