दिग्विजय के खिलाफ बड़ा चेहरा उतारने के फेर में चुनाव प्रचार में भी पिछड़ी भाजपा

विकास सिंह| पुनः संशोधित शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019 (16:32 IST)
भोपाल। लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की राजधानी सबसे अधिक हाई प्रोफाइल सीट बन गई है। 1989 से भोपाल सीट पर लगातार भाजपा अपना भगवा झंडा लहराती आ रही है, लेकिन इस बार सूबे में सत्ता में काबिज कांग्रेस ने भोपाल पर भाजपा का तिलिस्म तोड़ने और अपना कब्जा करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री को मैदान में उतार दिया।
दिग्विजय सिंह के चुनावी मैदान में आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यहीं हो गया कि भाजपा अपनी तरफ से किसे उतारेगी। भाजपा की तरफ से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुई। उसके बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम आगे आया और अब पार्टी के फायर ब्रांड नेता उमा भारती का नाम पर चर्चा तेज है। लेकिन बड़े नेताओं को उतारने के फेर में भाजपा में कांग्रेस से पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है।
कांग्रेस ने 23 मार्च को जारी अपनी सूची में भोपाल से दिग्विजय सिंह के नाम का एलान कर दिया था। नाम का एलान होने के साथ ही दिग्विजय सिंह भोपाल में जीत की राह तलाशने में जुट गए। एक पखवाड़े से अधिक समय से भोपाल में डेरा डालने वाले दिग्विजय सिंह ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है।
दिग्विजय सिंह हर दिन करीब तीन चुनावी कार्यक्रम में समाज के अलग अलग वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। दिग्विजय अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों में अलग अलग कार्यक्रमों में युवाओं, महिलाओं के वोट बैंक को साधने के लिए अपना चुनावी रौडमैप प्रस्तुत कर चुके हैं तो दूसरी ओर अपने चुनावी कार्यालय को शुरु कर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के मैनेजमेंट में जुटे हुए हैं।
वहीं दूसरी ओर वर्तमान में भोपाल सीट पर कब्जा जमाए भाजपा अब तक अपने उम्मीदवार का नाम ही नहीं तय कर पाई है। उम्मीदवार का नाम नहीं तय होने से पार्टी अब तक अपना चुनाव प्रचार भी नहीं शुरु कर पाई है। अब तक भोपाल से उम्मीदवार नहीं तय होने से जहां एक ओर भाजपा समर्थक निराश है वहीं संघ के नेताओं ने उम्मीदवारी के एलान होने में देरी पर नाराजगी जाहिर की है।

संघ ने भाजपा को चेताते हुए साफ कह दिया है कि भोपाल सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय को हल्के में लेने का खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठना पड़ सकता है। वहीं सूत्र बताते है कि संघ ने अब भोपाल सीट पर उम्मीदवार के चयन में दखल दे दिया है। संघ ने पार्टी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती को भोपाल से चुनाव लड़ने के लिए मना लिया है जबकि उमा भारती ने पहले लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।
वहीं भाजपा समर्थक कमलेश साहू वेबदुनिया से बातचीत में कहते है कि पार्टी की तरफ से उम्मीदवार के नाम का एलान में होने में देरी से पार्टी को नुकसान हो रहा हैं और पार्टी को जल्द से जल्द अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर देना चाहिए।

 

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