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Written By DW
Last Modified: शनिवार, 11 मार्च 2023 (10:42 IST)

यूरोप में हर 4 में 1 बच्चे पर क्यों मंडरा रहा है गरीबी का खतरा?

यूरोप में हर 4 में 1 बच्चे पर क्यों मंडरा रहा है गरीबी का खतरा? - one in our children at risk of poverty
गैर सरकारी संगठन सेव द चिल्ड्रन की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ के देशों में लगभग दो करोड़ बच्चे गरीबी में जी रहे हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यूरोप में चार में से एक बच्चे का गरीबी में जाने का खतरा है। और बुनियादी जरूरतों पर खर्च में वृद्धि और कोविड-19 महामारी गरीबी में इस वृद्धि के दो मुख्य कारण हैं।
 
खासतौर पर जर्मनी के बारे में यह रिपोर्ट कहती है कि 2021 में 20 लाख से ज्यादा बच्चे गरीबी में जी रहे थे। जर्मनी में बाल गरीबी और सामाजिक असमानता के एड्वोकेसी मैनेजर एरिक ग्रॉसहाउस ने कहा कि गरीबी में वृद्धि के आंकड़े "बहुत परेशान करने वाले" हैं। उन्होंने कहा, "जर्मनी में हर पांच में से एक बच्चा गरीबी में है और इसके लिए और कोई बहाना नहीं हो सकता।"
 
गरीबी समाप्त करने के लिए काम करने की जरूरत
ग्रॉसहाउस ने जर्मन सरकार से बाल गरीबी समाप्त करने के अपने वादे को पूरा करने का आग्रह किया।
 
सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ के देशों में गरीबी और सामाजिक बहिष्कार के जोखिम वाले बच्चों की उच्चतम दर रोमानिया में 41.5 प्रतिशत पाई गई, इसके बाद स्पेन में 33.4 प्रतिशत थी। जर्मनी में दर 23.5 प्रतिशत थी, जो यूरोप में औसत दर से थोड़ी कम है। फिनलैंड में बाल गरीबी की दर सबसे कम 13.2 प्रतिशत है, इसके बाद डेनमार्क में 14 प्रतिशत है।
 
पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच यूरोपीय संघ के 14 देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर सहायता एजेंसियों का कहना है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और गरीबों के लिए स्थिति बदतर हुई है। मध्यम वर्ग इससे विशेष रूप से प्रभावित हुआ है।
 
सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट में कहा गया है कि शरणार्थी, शरण चाहने वाले और जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं वे इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गरीबी के जोखिम में वे बच्चे भी हैं जो अपने माता-पिता में से किसी एक के साथ रहते हैं, जिनके परिवार बड़े हैं और आर्थिक रूप से स्थिर नहीं हैं, जो अक्षम हैं या जो जातीय अल्पसंख्यक हैं।
 
शरण चाहने वालों की संख्या बढ़ी
सेव द चिल्ड्रेन की यूरोपीय निदेशक याल्वा स्पर्लिंग का कहना है कि किसी भी बच्चे को भूखे पेट स्कूल नहीं जाना चाहिए, उन्हें ठंडे घर में नहीं रहना चाहिए और उन्हें अपने-माता के रोजगार की चिंता नहीं करनी चाहिए। वह कहती हैं, "लेकिन यूरोप में अभी भी कई संकटों के कारण, कई परिवार भोजन, हीटिंग सिस्टम से वंचित हैं। कई बच्चों के पास बढ़ने और एक अच्छा जीवन जीने के लिए आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं की कमी है।"
 
उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण में तेजी लाने और वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों पर यूरोप के कई संकटों के प्रभाव को कम करने के लिए साहसिक निर्णय और सामरिक वित्त पोषण की आवश्यकता है।
 
एए/सीके (एएफपी, डीपीए)
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