भारत ने किया गिलगित बाल्टिस्तान को अलग प्रांत बनाए जाने का विरोध

DW| Last Updated: बुधवार, 4 नवंबर 2020 (08:54 IST)
रिपोर्ट चारु कार्तिकेय

ने में गिलगित बाल्टिस्तान को अलग प्रांत बनाए जाने का विरोध किया है। पाकिस्तान सरकार के इस कदम को भारत द्वारा का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर देने की जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान सरकार को गिलगित बाल्टिस्तान में पहली बार चुनाव कराने की अनुमति दे दी थी। वहां 15 नवंबर को पहली बार चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री ने रविवार एक नवंबर को इलाके को देश का 5वां राज्य घोषित कर दिया। अभी तक इलाके को अर्द्ध-स्वायत्त (सैमी-ऑटोनोमस) दर्जा मिला हुआ था।
भारत ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि गिलगित बाल्टिस्तान, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान ने गिलगित बाल्टिस्तान पर गैरकानूनी रूप से कब्जा जमाया हुआ है। विदेश मंत्रालय ने पूरे मामले पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने यह कदम इलाके पर अपने अवैध कब्जे को छुपाने के लिए उठाया है।

मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इस बात को छिपा नहीं सकता कि वो पिछले 70 सालों से वहां के लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन कर रहा है, उनका शोषण कर रहा है और उनकी अभिव्यक्ति की आजादी का हनन कर रहा है। भारत ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान तुरंत उन सभी इलाकों से अपना नियंत्रण हटा ले जिन पर उसने अवैध कब्जा किया हुआ है।

गिलगित बाल्टिस्तान कश्मीर इलाके का एक हिस्सा है जिसे लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पुराना विवाद है। यह भारत के जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के उत्तर-पश्चिम में पड़ता है। पाक अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान का खैबर-पख्तुनख्वा प्रांत, अफगानिस्तान का वखान गलियारा और चीन का शिंकियांग इलाका इससे सटे हुए हैं।

माना जा रहा है कि उसे अलग राज्य का दर्जा देकर पाकिस्तान सरकार ने भारत द्वारा जम्मू और कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को हटाने के खिलाफ जवाबी कार्रवाई है। भारत ने यह कदम 5 अगस्त 2019 को उठाया था और पाकिस्तान तब से इसकी आलोचना कर रहा है।



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