भारत: आम लोगों को कोरोना का टीका कैसे लगेगा

DW| Last Updated: सोमवार, 11 जनवरी 2021 (15:08 IST)
रिपोर्ट : आमिर अंसारी

भारत में 16 जनवरी से कोरोना के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। कोविड-19 के पहले चरण में कुछ खास लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। आम जनता में कार्यक्रम को लेकर काफी उत्सुकता दिख रही है।
केंद्र सरकार के मुताबिक के खिलाफ वैक्सीन के लिए प्राथमिकता वाले समूहों में संक्रमित होने या मृत्यु का खतरा ज्यादा होने वाले लोग, स्वास्थ्यकर्मी, अंग्रिम पंक्ति के कर्मचारी, 50 वर्ष के ऊपर के उम्र वाले लोग और पहले से बीमार व्यक्ति शामिल हैं। भारत जैसे देश में जहां आबादी 1।3 अरब के करीब है, वहां वैक्सीन कार्यक्रम चलाना कोई आसान काम नहीं है। इसीलिए सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार टीका कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी राज्यों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के साथ बांट भी रही है ताकि लोगों तक जानकारी का अभाव ना हो।
यहीं नहीं, सरकार टीके को लेकर कोई भी गलत जानकारी लोगों तक ना पहुंचे और अफवाह से बचाने के लिए उचित समय पर सोशल मीडिया के सहारे सूचना दे रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है और यह चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होगी। उसका कहना है कि कोविड-19 वैक्सीन के साथ-साथ कोरोना अनुरूप व्यवहार भी कोविड-19 संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है। कोविड-19 वैक्सीन के लाभार्थियों का पहले से रजिस्टर्ड होना जरूरी है। सरकार के मुताबिक वैक्सीन उनको नहीं दी जाएगी जो पंजीकृत नहीं है।
कोविड-19 वैक्सीन के लिए कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन?

दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के लिए एक पुख्‍ता आधार और सहायक व्‍यवस्‍था देने के लिए सरकार ने एक मजबूत प्रौद्योगिकी विकसित की है। बीते दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीकाकरण के मुख्‍य आधार कोविन सॉफ्टवेयर पर चर्चा के लिए एक अहम बैठक भी की थी। सरकार ने दो वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी है जिनमें सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन और भारत बायोटेक की शामिल हैं। देश में आपात मंजूरी मिलने के साथ ही लोगों में कोरोना के खिलाफ टीके को लगवाने की उत्सुकता भी बढ़ गई है।
कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए प्रौद्योगिकी और डाटा प्रबंधन पर गठित अधिकार प्राप्‍त समूह के अध्‍यक्ष और कोविड-19 के टीकाकरण प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह के सदस्य राम सेवक शर्मा के मुताबिक एक सक्षम, विश्‍वसनीय और त्‍वरित तकनीक से देश के कोविड-19 टीकाकरण के लिए आधार और बैकअप दोनों तैयार होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम होगा। उनके मुताबिक टीकाकरण संबंधी डाटा रियल टाइम हासिल करना अहम है और से इसमें खास तौर पर मदद मिलेगी। इससे लाभार्थियों को आसानी से पहचाना जाएगा।
अनुमान के मुताबिक स्वास्थ्य कर्मचारियों और अंग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों जिन्हें टीका लगाया जाएगा उनकी संख्या करीब तीन करोड़ है। हालांकि कोविड-19 वैक्सीन की शुरूआत के लिए कोविन डिजिटल मंच होगा लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि गूगल प्ले या एप्पल स्टोर से किसी भी तरह का ऐप नहीं डाउनलोड करना चाहिए क्योंकि आधिकारिक ऐप अभी रिलीज नहीं हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे किसी ऐप पर अपनी निजी जानकारी नहीं डालनी चाहिए जो कि सरकार द्वारा अधिकृत नहीं है। कोविन ऐप अभी प्री-प्रोडक्ट चरण में है। इसमें स्वास्थ्य अधिकारियों का डाटा है जो टीकाकरण कराने के लिए पहली कतार में होंगे।
आम लोगों को क्या करना होगा?

वर्तमान में आम लोग कोरोनावायरस महामारी के लिए शुरू हो रही वैक्सीन के लिए पंजीकरण नहीं करा सकते हैं क्योंकि फिलहाल इस तक पहुंच अधिकारियों के पास ही है। एक बार जब ऐप लाइव हो जाएगा और प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा तो इसके 4 मॉड्यूल होंगे-यूजर एडमिनिस्ट्रेटर मॉड्यूल, लाभार्थी पंजीकरण, टीकाकरण-स्वीकृति और स्टेटस अपडेशन। एक बार लाइव होने के बाद कोविन ऐप या वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के विकल्प मिलेंगे जिसमें सेल्फ रजिस्ट्रेशन, इंडीविजुअल रजिस्ट्रेशन और बल्क अपलोड शामिल होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐप लाइव होने पर लोगों को इसमें पंजीकरण कराने के लिए फोटो पहचान पत्र अपलोड करना होगा। जरूरी दस्तावेजों में आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट या जॉब कार्ड मान्य होंगे। आम लोगों को वैक्सीन के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी इसकी अभी जानकारी नहीं दी गई है।



और भी पढ़ें :