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जलवायु परिवर्तन से तहस-नहस हो रहा है वन्य जीवन

Updated: मंगलवार, 13 नवंबर 2018 (11:50 IST)
बढ़ता तापमान, समुद्र का बढ़ता जलस्तर या जंगलों में आग। जलवायु परिवर्तन के ये बस कुछ उदाहरण हैं। आइए जानते हैं कि वन्य जीवन पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है।
 
 
जंगलों में आग
हाल के वर्षों में अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग ने दुनिया का ध्यान खींचा है। आग लगने के पीछे कारण इंसानों का जंगलों पर कब्जा और वन प्रबंधन की कमी भी है। वन्य जीवन के विशेषज्ञ डेविड बाउमन कहते हैं कि स्थिति पहले से ही खराब थी और जलवायु परिवर्तन ने इसे और बढ़ा दिया है।
 
 
सूखे का प्रकोप
पिछले 20 वर्षों से कैलिफोर्निया और दक्षिणी यूरोप ने कई बार सूखे की मार झेली है। जलवायु परिवर्तन से न सिर्फ गर्म और सूखी हवाएं चलने लगीं बल्कि जरूरी नमी भी कम होती गई। नतीजा यह कि जमीन सूखने लगी, जिससे जंगलों की आग को और बढ़ावा मिला। सूखे का मतलब है पेड़ों का मुरझा जाना और इसने आग के लिए ईंधन का काम किया।
 
 
हरे-भरे पेड़ गायब
बदलते मौसम ने हरे-भरे पेड़ों से उनकी खूबसूरती छीन ली और नई प्रजातियों के पौधे मौसम के अनुकूल ढल गए। पौधों से नमी गायब होती गई और कांटेदार पौधों व झाड़ियों का कब्जा बढ़ता गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परिवर्तन तेजी से आया और अमेरिका के जंगलों में रोजमैरी और लैंवेडर के जंगली पौधे दिखने लगे।
 
 
भूजल का गिरता स्तर
बारिश में कमी और बढ़ते तापमानों ने पेड़-पौधों की जड़ों पर असर डाला। पानी की तलाश में वे और नीचे तक बढ़ते चले गए और इससे भूजल का स्तर गिरता चला गया। आम लोगों को पानी के लिए सैकड़ों फीट नीचे तक खुदाई करनी पड़ती है, फिर भी पानी नहीं मिलता।
 
 
कमजोर हुईं हवाएं
सामान्य तौर पर उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया का मौसम शक्तिशाली और तेज हवाओं पर निर्भर होता है जो ध्रुवीय और भूमध्य क्षेत्र के बीच के विपरीत तापमानों की वजह से पैदा होती है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से आर्कटिक क्षेत्र का तापमान वैश्विक तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ा है। इसकी वजह से हवाएं की रफ्तार कमजोर हुई है और महाद्वीप के मौसम पर असर पड़ा है।
 
 
बीटल की तबाही
तापमान बढ़ने से बीटल कनाडा के बोरियल जंगलों की ओर भाग रहे हैं। इन्होंने यहां तबाही मचाई हुई है और पेड़ों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। पेड़ सूख रहे हैं और जंगलों में आग को और भड़का रहे हैं। पेड़-पौधों के जलने से वायुमंडल को भारी नुकसान पहुंच रहा है और यह जलवायु परिवर्तन को बदतर बना रहे हैं। (एएफपी)
 

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