खाद्य तेल ने तोड़े महंगाई के रिकॉर्ड, 1 साल में आम आदमी हुआ बेहाल

नृपेंद्र गुप्ता| Last Updated: बुधवार, 26 मई 2021 (14:56 IST)
इंदौर। देश में एक ओर कोरोनावायरस (Coronavirus) से बुरा हाल है तो दूसरी तरह आम आदमी से भी बेहाल है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के बाद के दाम भी 1 साल में काफी तेजी से बढ़े हैं।
सोयाबीन तेल के दाम आसमान पर नजर आ रहे हैं तो सरसों तेल के भाव भी लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। मूंगफली और सनफ्लावर के दाम भी लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की बात करें तो यहां मई 2020 में सरसों तेल 110-115 रुपए प्रति लीटर मिल रहा था। आज वही सरसों तेल का दाम खुदरा बाजारों में 200 रुपए लीटर हो चुका है। मूंगफली तेल पिछले वर्ष मई में 120 रुपए प्रति लीटर तक था, इस वर्ष बढ़कर 180 से 190 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया।
इसी तरह सोयाबीन तेल और सन फ्लावर तेल के दाम भी 1 साल में काफी तेजी से बढ़े हैं। सोयाबीन तेल पिछले वर्ष मई में 70 से 80 रुपए था जबकि 1 साल में यह बढ़कर 160 रुपए प्रति लीटर हो गया। वहीं सनफ्लावर तेल भी 12 माह में 120 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 190 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

जागरूक उपभोक्ता समिति के मुकेश अमोलिया ने बताया कि तेल के दाम जिस तेजी से बढ़ रहे हैं उतना पिछले काफी समय में नहीं हुआ। दाम धीरे-धीरे बढ़ते चले गए। पिछले 10-12 साल में यह स्थिति कभी नहीं आई। पहली बार ऐसा हुआ की दाम बढ़े तो कम ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर समय रहते ध्यान देना चाहिए था यहां चूक हुई और तेल के दाम नियंत्रण के बाहर हो गए।
अमोलिया ने बताया कि कोरोना काल में पहले ही व्यक्ति रोजगार का संकट झेल रहा है। ऊपर से बीमारी का खतरा अलग सता रहा है। इस स्थिति में तेल के दाम बढ़ने से उसकी समस्याएं काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि खाद्य वस्तू अधिनियम के तहत खाद्य तेल के दाम नियंत्रित किए जाने चाहिए साथ ही इस पर टैक्स भी कम किया जाना चाहिए।



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