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मोदी सरकार ने चीनी निर्यात पर लगाई रोक: आम जनता को राहत, मिलों और वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?

Updated: गुरुवार, 14 मई 2026 (07:52 IST)
Ban on Sugar Export : मिडिल ईस्ट में जारी संकट की वजह से वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता के बीच मोदी सरकार ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगा दी। चीनी की कीमतें नियंत्रित रखने के लिए यह फैसला किया गया है।
 
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अधिसूचना जारी कर कच्चे, सफेद और रिफाइंड चीनी निर्यात पर रोक लगाई। निर्यात प्रतिबंध सितंबर के अंत तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। 
 
DGFT ने साफ किया है कि प्रतिबंध अमेरिका और यूरोपीय यूनियन पर लागू नहीं होगा। यदि लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो गई थी या माल कस्टम्स को सौंपा जा चुका था, तो उसे नहीं रोका जाएगा। अधिसूचना में कहा गया है कि अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए भारत सरकार के विशेष अनुरोध पर निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।
 

क्या होगा फैसले का असर

घरेलू उपभोक्ताओं पर असर : निर्यात पर रोक का सबसे बड़ा उद्देश्य स्थानीय बाजार में चीनी की कीमतों को बढ़ने से रोकना है। आपूर्ति बढ़ने से आम जनता के लिए चीनी के दाम नहीं बढ़ेंगे। खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
 
चीनी मिलों और व्यापारियों पर असर : इस फैसले से मिलों के पास सरप्लस स्टॉक जमा हो सकता है। निर्यात से मिलों को विदेशी मुद्रा और बेहतर दाम मिलते थे, जो अब रुक जाएंगे। जिन व्यापारियों ने पहले से निर्यात के सौदे कर रखे थे, उनके लिए इन ऑर्डर्स को पूरा करना एक बड़ी सिरदर्द बन गया है। 
 
किसानों पर प्रभाव : चीनी मिलों की कमाई कम होने से किसानों के गन्ना बकाया के भुगतान में देरी होने की संभावना बढ़ सकती है। यदि निर्यात पर लंबी रोक रहती है और मिलें समय पर भुगतान नहीं कर पातीं, तो किसान भविष्य में गन्ने के बजाय अन्य फसलों की ओर रुख कर सकते हैं।
 
एथेनॉल उत्पादन पर ध्यान: निर्यात रुकने से सरकार मिलों को अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल बनाने में डाइवर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे भारत के 'एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम' को गति मिल सकती है, जिससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी।

वैश्विक बाजार पर असर: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। भारत के हटने से वैश्विक बाजार में चीनी की कमी होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आएगी। भारत की अनुपस्थिति का लाभ ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों को मिलेगा, जो अब एशियाई और अफ्रीकी बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करेंगे।
edited by : Nrapendra Gupta

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