उड़न तश्तरी की हकीकत, कितनी सही कितनी झूठ

नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 2 जुलाई 2020 (12:22 IST)

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नई दिल्ली। चीन के एक खगोल विज्ञानी ने दुनिया में पहली बार उड़न तश्तरी देखने का दावा किया था। उसके बाद से आकाश में इस तरह की चमकती वस्तुएं देखने की घटनाएं लगातार सामने आने लगीं और अमेरिका, फ्रांस, स्वीडन, रूस आदि देशों में इस पर अध्ययन के लिए कई समितियां गठित की गईं।
प्रत्यक्षदर्शी दावे से कह रहे हैं कि ये चमकदार उड़न तश्तरियां चीन की सीमा से आती हैं। चीन के खगोल विज्ञानी ने ईसा पूर्व 410 वर्षा में उड़न तश्तरी देखने का दावा किया था, तब से आज तक इंसानों की दिलचस्पी उड़न तश्तरी में जरा भी कम नहीं हुई है। यही वजह है कि उन पर दुनियाभर में कई फिल्में बन चुकी हैं एवं सैकड़ों किताबें लिखी जा चुकी हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले 2 हजार साल में अज्ञात वस्तुओं को आकाश में उड़ता देखने का दावा करने वालों की संख्या सैकड़ों थी, लेकिन पिछले 200 सालों में यह संख्या बढ़कर हजारों में पहुंच गई है।

अमेरिकी कारोबारी कैनेथ अर्नाल्ड ने जून 1947 में अपने हेलीकॉप्टर से वॉशिंगटन की नजदीकी पहाड़ियों के ऊपर अर्ध चंद्राकार की 9 अज्ञात वस्तु आकाश में उड़ती देखी थी। उसका दावा था कि उनकी गति कम से कम कई हजार किलोमीटर की रही होगी।

उसने बताया था कि अज्ञात वस्तुएं ऐसी लग रही थीं जैसे समुद्र में तेज गति से तश्तरियां तैर रही हों। अगले ही दिन अखबारों की सुर्खियां थी- अमेरिका में उड़न तश्तरी देखी गईं। इस तरह आकाश में उड़ने वाली अज्ञात वस्तुओं का नाम उड़न तश्तरी यानी अनआइडेंटीफाइडऑब्जेक्ट (यूएफओ) पड़ गया।

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