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पृथ्वी के नीचे छिपी दुनिया का बड़ा खुलासा! भारतीय उपमहाद्वीप जितना विशाल भूभाग मिला
The map is not to scale.
धरती पर 7 महाद्वीप हैं। ज़ीलैंडिया (Zealandia) को दुनिया का आठवां महाद्वीप (8th Continent) कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के अंदर डूबा हुआ एक विशाल भूभाग है, जो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित है। कहते हैं कि लगभग 49 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया के आकार का लगभग दो-तिहाई है और इसका क्षेत्रफल भारतीय उपमहाद्वीप के बराबर है। 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के एक हालिया लेख ने इस अद्भुत भूवैज्ञानिक खोज में फिर से दिलचस्पी जगा दी है। चलिए जानते हैं इस महाद्वीप की मुख्य बातें।
धरती पर 7 महाद्वीप हैं। ज़ीलैंडिया (Zealandia) को दुनिया का आठवां महाद्वीप (8th Continent) कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के अंदर डूबा हुआ एक विशाल भूभाग है, जो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित है। कहते हैं कि लगभग 49 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया के आकार का लगभग दो-तिहाई है और इसका क्षेत्रफल भारतीय उपमहाद्वीप के बराबर है। 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के एक हालिया लेख ने इस अद्भुत भूवैज्ञानिक खोज में फिर से दिलचस्पी जगा दी है। चलिए जानते हैं इस महाद्वीप की मुख्य बातें।
94% हिस्सा पानी के नीचे: ज़ीलैंडिया का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा प्रशांत महासागर के गहरे पानी में डूबा हुआ है।
दिखने वाला हिस्सा: इस महाद्वीप का केवल 6 प्रतिशत हिस्सा ही पानी के बाहर दिखाई देता है, जिसे आज हम न्यूजीलैंड और न्यू कैलेडोनिया (New Caledonia) द्वीपों के नाम से जानते हैं।
आकार (Size): इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 49 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह आकार में भारत से भी बड़ा है और ग्रीनलैंड से लगभग दोगुना है, हालांकि यह दुनिया का सबसे छोटा महाद्वीप है।
यह समुद्र का तल क्यों नहीं है?: वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी बनावट आम समुद्री चट्टानों जैसी नहीं है। इसकी क्रस्ट (धरती की ऊपरी परत) काफी मोटी है और यह महाद्वीपीय ग्रेनाइट चट्टानों से बना है, जो इसे समुद्र के तल से अलग कर एक वास्तविक महाद्वीप बनाती है।
इतिहास: लगभग 8.5 करोड़ साल पहले, ज़ीलैंडिया महाद्वीप 'गोंडवानालैंड' (Gondwana) नाम के एक विशाल प्राचीन महाद्वीप का हिस्सा था। जब गोंडवानालैंड टूटा, तो यह हिस्सा अलग हो गया और टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने व खिंचाव के कारण यह धीरे-धीरे पतला होकर समुद्र में डूब गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़ीलैंडिया का नक्शा पूरी तरह तैयार होने से पृथ्वी के इतिहास, प्राचीन जीवों के विकास और टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल को समझने में बहुत मदद मिलेगी।
