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Summer Poem : गर्मी का गोला

Updated: गुरुवार, 9 अप्रैल 2020 (17:16 IST)
बाल कविता
 
जाने क्या सूझा सूरज को,
जन-गण-मन पर हमला बोला।
मार्च माह जाते-जाते ही,
दाग दिया गर्मी का गोला।
 
सर्र फर्राती हवा चल पड़ी।
तीर चले अंगारों वाले।
धरती हो गई गर्म तवे सी,
पड़ने लगे पगों में छाले।
 
मौसम के नीले सागर में
इस निर्मम ने लावा घोला।
 
खत्म परीक्षा आए नतीजे,
पर शाला से मिली न छुट्टी।
बस्ता कंधे पीठ किताबों,
से कर पाए अभी न कुट्टी।
 
नहीं किसी शाला ने अब तक,
छुट्टी देने को मुंह खोला।
 
सूरज शिक्षक सरकारों को,
नहीं दया हम पर आती है।
किरणों के चाबुक से हमको,
भरी दुपहरिया पिटवाती है।
 
सूरज से अब हम क्या बोलें,
घड़ा धूप का सिर पर ढोला।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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