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होली पर मजेदार कविता : फूट गई पिचकारी

Happy Holi Poem for Kids
रम्मू जी ने पिचकारी में,
रंग लबालब ठूंसा।
दौड़े गम्मू के पीछे यूं,
मार रहे हों घूंसा।
 
हाथ चलाया जोरों से तो,
फूट गई पिचकारी।
रम्मू के मुंह पर ही आई,
ठेल रंगों की सारी।
 
गम्मू पर तो गिरी बूंद न,
रम्मू रंगे रंगाएं।
हाथ झटकते पैर पटकते,  
घर को वापस आएं।
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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