dharma sangrah
✕

बच्चों की कविता : कांटा चलता रहे घड़ी का

Updated: शुक्रवार, 3 मार्च 2023 (12:30 IST)
हमें नहीं बांचों चिट्ठी सा।
नहीं पढ़ों अखबार सरीखा।
 
हम बच्चों की दिनचर्या का,
अब खोजो कुछ नया तरीका।
 
सुबह आठ से शाम चार तक,
दिन भर शाला में खटते हैं।
 
और रात को होम वर्क से,
बेदम होकर के थकते हैं।
 
सुबह-सुबह जब हम उठते हैं,
दिखता चेहरा नीरस फीका।
 
ऐसा कुछ कर दो, कुछ घंटे, 
साथ रहें मम्मी पापा के।
 
घंटे, दो घंटे कम कर दो,
हम बच्चों के अब शाला के,
 
बात हमारी मानोगे तो,
निश्चित होगा भला सभी का।
 
घर-घर के बच्चे खुश होंगे,
खुश होंगे सब मम्मी पापा।
 
खुशियों से मम्मी पापा का,
नहीं आएगा जल्द बुढ़ापा।
 
हंसी ख़ुशी से इसी तरह से,
कांटा चलता रहे घड़ी का।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख