dharma sangrah
✕

सर्दी के दिनों पर कविता : छींक रहे पापा जुकाम से

Updated: गुरुवार, 15 नवंबर 2018 (13:24 IST)
शीत लहर में आंगन वाले,
बड़ के पत्ते हुए तर बतर।
 
चारों तरफ धुंध फैली है,
नहीं कामवाली है आई।
 
और दूध वाले भैया ने,
नहीं डोर की बैल बजाई।
 
झाड़ू पौंछा कर मम्मी ने,
साफ कर लिया है खुद ही घर।
 
दादा दादी को दीदी ने,
बिना दूध की चाय पिलाई।
 
कन टोपा और स्वेटर मेरा,
मामी अलमारी से लाई।
 
मामाजी अब तक सोए हैं,
उनको बस से जाना था घर।
 
बर्फ कणों वाला यह मौसम,
मुझको तो है बहुत सुहाता।
 
दौड़ लगा लूं किसी पार्क में,
ऐसा मेरे मन में आता।
 
बिना इजाजत पापाजी के,
यह कुछ भी न कर पाता पर।
 
विद्यालय जा पाएं कैसे,
यही सोचते बैठे हैं हम।
 
इंतजार है किसी तरह से,
शीत लहर कुछ हो जाए कम।
 
छींक रहे पापा जुकाम से,
उनको है हल्का-हल्का ज्वर।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

World Sight Day: क्‍यों मनाते हैं विश्व दृष्टि दिवस? जानिए इसका महत्‍व और इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

अगला लेख