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बाल गीत: हमको पैदल चलना है

Updated: शनिवार, 2 मई 2026 (17:21 IST)
नहीं कार में, ना ही बस में,
ना बाइक पर जाना है।
दादाजी के संग में पैदल,
चलकर हमें दिखाना है।
सूर्योदय से पहले घर से,
हमें निकलना हैं।
हमको पैदल चलना है।
 
सूर्योदय के समय सुहाना,
मौसम हमको भाता है।
पौधे पेड़ खूब हंसते हैं,
फूल-फूल मुस्काता है।
हमको भी तो इन फूलों के,
जैसे खिलना है।
हमको पैदल चलना है।

दादाजी पैदल चलते पर,
हम तो दौड़ लगा देते।
एक किलोमीटर आगे तक,
जाकर वापस आ जाते।
स्वस्थ हमें रहना हैं, इससे,
मेहनत करना है।
हमको पैदल चलना है।
 
पैदल चलकर स्वस्थ रहेंगे,
ईंधन पर होगा अंकुश।
और प्रदूषण इसके कारण,
थोड़ा तो होगा कम कुछ ।
इस आदत में हमको थोड़ा,
थोड़ा ढलना है।
हमको पैदल चलना है।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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