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मजेदार बाल कविता : मक्खी का आटा

Updated: सोमवार, 2 अगस्त 2021 (18:43 IST)
Makkhi n mosquito
 
हाथ बढ़ाकर मक्खी दीदी,
पीस रही थी चक्की।
तभी कहीं से आया मच्छर,
जो था पूरा झक्की।
 
भन-भन करते बड़ी जोर से,
मक्खी जी को काटा।
जान छोड़कर भागी मक्खी,
धरा रह गया आटा।
 
 
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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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