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बाल कविता : मम्मी पिलाती डांट की घुट्टी

Updated: शनिवार, 16 सितम्बर 2017 (12:23 IST)
होमवर्क करना पड़ता है, 
किस बात की होती छुट्टी। 
जब देखो तब मम्मी मेरी, 
पिलाती डांट की घुट्टी।
 
घूमने कहीं जाने न देती, 
घर पर ही खेलूं कोई खेल। 
कहती करो पढ़ाई जम के, 
नहीं तो हो जाओगे फेल। 
 
सैर-सपाटा जाने नहीं देती, 
बांध के हरदम रखती मुट्ठी। 
जब देखो तब मम्मी मेरी, 
पिलाती डांट की घुट्टी।
 
कुछ दिन ही हैं स्कूल खुलेंगे, 
फिर समय न जल्दी आएगा। 
समझ मजबूरी अपनी पप्पू, 
नित्य विद्यालय जाएगा। 
 
लिखी कॉपियां मुरझाएंगी, 
बन जाएगी जल्द ही रद्दी। 
जब देखो तब मम्मी मेरी, 
पिलाती डांट की घुट्टी। 
 
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ

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