ramcharitmanas
✕

बारिश पर कविता : धरणी लागे अति प्यारी...

Updated: शनिवार, 16 सितम्बर 2017 (11:42 IST)
बरखा रानी के आते ही, 
छाई कुल हरियाली। 
हरे-भरे हैं बाग-बगीचे, 
धरणी लागे अति प्यारी।
 
भ्रमर नृत्य कलियों पर करता, 
सुना-सुना के तान। 
पुष्प निहारे भ्रमर राज को, 
बन उनकी पहिचान।
 
मोर मगन हो बन में नाचे, 
चहक रही सब क्यारी। 
हरे-भरे हैं बाग-बगीचे, 
धरणी लागे अति प्यारी।
 
बदरा कड़के अम्बर बरसे, 
चम-चम-चम जुगनू चमके। 
यौवन उधम मचाए अब तो, 
खन-खन-खन कंगन खनके। 
 
जब किसान खेतों को देखे, 
मन में होवे खुशहाली। 
हरे-भरे हैं बाग-बगीचे, 
धरणी लागे अति प्यारी।
 
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?

31 अक्टूबर पुण्यतिथि: इंदिरा गांधी की मृत्यु कब, कहां, क्यों और कैसे हुई थी?

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

अगला लेख