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बाल कविता : रजाई

Updated: शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020 (15:17 IST)
शेर सिंह को ठंड लगी तो,
लाए एक रजाई।
 
ओढ़ तानकर खूब सोए वे,
नींद मजे की आई।
 
नींद खुली तो पाई उन्होंने
नई रजाई गायब।
 
पता नहीं मोटा सा चूहा 
पूरी काट गया कब।
 

लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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