sawan somwar

बाल कविता : समय कभी न व्यर्थ गंवाओ

Updated: सोमवार, 14 फ़रवरी 2022 (19:40 IST)
पूरब की खिड़की से झांका,
नन्हा बालक भोला भाला।
अरे-अरे यह तो सूरज है,
आया ओढ़े लाल दुशाला।
 
हवा चल पड़ी ठंडी-ठंडी,
डाली फूलों को दुलरातीं।
नदियों, झरनों, तालाबों के,
नीले जल पर चंवर ढुलाती।
 
किरणों के घोड़े पर बैठी,
धूप आ गई मस्ती करती।
अलसाए प्राणी पौधों में,
नई ताजगी ऊर्जा भरती।
 
उड़ने लगे परिंदे नभ में,
तितली भंवरे भी इठलाए।
किए बिना ही देर दौड़कर,
फूलों पर आकर मंडराए।
 
सूरज ने संदेश दिया है,
जल्दी उठो काम पर जाओ।
पाना है अपनी मंजिल तो,
समय कभी न व्यर्थ गंवाओ।     
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख