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कविता : अंगद जैसा पैर जमा

Updated: गुरुवार, 18 मई 2017 (14:58 IST)
अ अनार का बोला था।
आम पेड़ से तोड़ा था।
 
इ मली सच में खट्टी है।
ईख बहुत ही मिट्ठी है।
 
उल्लू बैठ डाल पर।
ऊन रखा रूमाल पर।
 
एड़ी फट गई धूप में।
ऐनक गिर गई कूप में।
 
ओखल में मत रखना सिर।
औरत तेज बहुत है डर।
 
अंगद जैसा पैर जमा।
अः अः कर फिर चिल्ला।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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