Hanuman Chalisa

तुम चलत सहमित संस्फुरत !

Updated: गुरुवार, 18 मई 2017 (14:45 IST)
गोपाल बघेल 'मधु'
तुम चलत सहमित संस्फुरत,
स्मित औ सिहरत प्रष्फुटत। 
परिप्रेक्ष्य लखि परिद्रश्य तकि,
पटकथा औ पार्थक्य लखि ।
 
उड़िकें गगन आए धरणि,
बहु वेग कौ करिकें शमन।
वरिकें नमन भास्वर नयन,
ज्यों यान उतरत पट्टियन ।
 
बचिकें विमानन जिमि विचरि,
गतिरोध कौ अवरोध तरि।
आत्मा चलत झांकत जगत,
मन सहज करि लखि क्षुद्र गति ।
 
आकाश कौ आभास तजि,
वाताश कौ भूलत परश।
ऊर्जा अगिनि संयत करत,
वारिधि की बाधा करि विरत ।
 
अहसास अपनौ पुनि करत,
विश्वास प्रभु सत्ता रखत।
'मधु' चेतना चित वृति फुरत,
चिर नियंता, आदेश रत।
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

कविता- तू ना हो तो...

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

Azad Jayanti 2026: जयंती विशेष: चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की ऐसी घटनाएं, जिन्हें हर युवा को जानना चाहिए

ब्रिटिश सरकार न सरस्वती प्रतिमा वापस करेगी, न कोहिनूर हीरा

अगला लेख