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कविता : हमको आगे बढ़ना है

Updated: गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017 (15:18 IST)
मंजिल को जब है पाना,
खतरों से क्यों कर डरना।
बाधाओं से टकराकर,
हमको है आगे बढ़ना।
 
आंधी हो चाहे तूफान,
पथ पर हमें न है रुकना।
हर सूरत में जैसा भी हो,
हमको है आगे बढ़ना।
 
पढ़-लिखकर हम सबको,
भारत का है शान बढ़ाना।
इसकी सेवा में रत रहकर,
हमको है आगे बढ़ना।
लेखक के बारे में
डॉ. प्रमोद सोनवानी 'पुष्प'

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