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बाल गीत : कौआ बोला

Updated: शुक्रवार, 24 जनवरी 2020 (11:43 IST)
कौआ बोला कांव-कांव जी
बार-बार बस कांव-कांव जी।
 
बोली मुन्नी, छत पर चलना,
मुझे अभी कौए से मिलना।
कौआ सोता कहां बताओ?
कथा अभी उसकी सुनाओ जी।
 
कौआ सुबह-सुबह क्यों आता?
खुद का घर क्यों नहीं बनाता?
अपनी मां से लड़ता है क्या,
बात मुझे सच्ची बताओ जी।
 
कहती दादी, कौआ आया
खबर कोई अच्छी सी लाया।
अतिथि कोई है आनेवाला,
चाय-नाश्ता तो बनाओ जी।
 
दादी की बातें क्या सच हैं,
बातें क्या सच में ही सच हैं।
या ये बातें मनगढंत हैं,
मुझको यह सच-सच बताओ जी।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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