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बाल कविता : टेढ़े आंगन नहीं नाचना

Updated: मंगलवार, 1 जून 2021 (17:03 IST)
Bear Poem
 

मार-मार कर लगा नचाने, 
पर भालू न नाचा।
जड़ा मदारी ने गुस्से में, 
उसके गाल तमाचा।
 
भालू बोला नाच नहीं,
होता है लड्डू पेड़ा।
नहीं देखते यह आंगन है, 
कितना टेढा मेढा।
 
ऐसे आंगन और नाच का, 
है संबंध पुराना।
टेढ़े आंगन नहीं नाचना,
बोल गए हैं नाना।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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