sawan somwar

बालगीत : किससे अब उपचार कराएं...

Updated: शुक्रवार, 27 मई 2016 (14:01 IST)
अब लगती है कथा-कहानी,
है सच्ची पर बात पुरानी।


 
नदी भरी थी नीले जल से,
झरनों के स्वर थे कल-कल के।
 
पर्वत, जंगल, हरियाली थी,
सभी ओर बस खुशहाली थी।
 
वह दिन कैसे वापस आएं,
किससे अब उपचार कराएं।
 
लोग खुले दिलवाले थे तब,
मन के भोले-भाले थे तब।
 
जैसे भीतर, वैसे बाहर,
खुशी बांटते मुट्ठी भर-भर।
 
मन के भीतर द्वेष नहीं था,
घृणा भाव भी शेष नहीं था।
 
रोते चेहरे फिर हंस पाएं,
किससे अब उपचार कराएं।
 
बहुत हुई छल-छंद बनावट,
झूठी मुस्कानों की जमघट।
 
रिश्ते-नाते सिर्फ दिखावा,
हुई जिंदगी एक तमाशा।
 
पैसे फेंको काम कराओ,
पैसे से ही इज्जत पाओ।
 
कैसे मिथ्याचार हटाएं,
किससे अब उपचार कराएं।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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