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बच्चों की मजेदार कविता : बंदर जी की सत्य कथा

Updated: सोमवार, 3 फ़रवरी 2020 (13:03 IST)
दाढ़ी के डिब्बे से बंदर, 
भाग गया लेकर सामान।
दाढ़ी उसकी बहुत बड़ी है,
अभी-अभी आया है ध्यान।
 
लगा गाल में साबुन उसने, 
रेजर खूब चलाई।
दाढ़ी में से नदी खून की,
तेजी से बह आई।
 
घबराकर बंदर भैया ने,
फेंकी रेजर ब्लैड।
रोते-रोते बैठ गए वे, 
पकड़े अपना पेट।
 
नकल किसी की भी करने से,
होता है नुकसान।
बंदरजी की सत्य कथा यह,
सुनो खोलकर कान।

लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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