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बर्फ की आस में भयानक सर्दी के साथ शुरू हुआ चिल्लेकलां कश्मीर में

Updated: गुरुवार, 21 दिसंबर 2023 (14:45 IST)
Chillekalan started with terrible cold in Kashmir : कश्‍मीर में 40 दिनों की सबसे कठोर सर्दियों की अवधि में से एक 'चिल्लेकलां' (Chillekalan) गुरुवार से शुरू हो गया है जबकि बुधवार को कश्मीर में तीव्र शीतलहर (severe cold) चल रही थी। 'चिल्लेकलां' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'प्रचंड ठंड'। इस दौरान अब चल रही शीतलहर अपने चरम पर पहुंच जाएगी और कश्मीर (Kashmir) के पहाड़ हफ्तों तक बर्फ से ढंके रहेंगे और डल झील भी हिमांक बिंदु तक पहुंच जाएगी।
 
कश्मीर में 40 दिनों का भयानक सर्दी का मौसम, जिसे स्थानीय भाषा में चिल्लेकलां कहा जाता है, सूखे के साथ ही आरंभ हुआ है। हालांकि कश्मीरियों को आस है कि जल्द बर्फबारी होगी और सूखे से निजात मिलेगी। वैसे मौसम विज्ञान विभाग का कहना था कि चिल्लेकलां पर मौसम मुख्य रूप से आंशिक रूप से बादल छाए रहने के लिए साफ है और उन्होंने उम्मीद जताई की 26 दिसंबर से बर्फबारी हो सकती है।
 
डल झील जम जाएगी : इतना जरूर था कि श्रीनगर में तापमान शून्य से 5.4 डिग्री सेल्सियस नीचे गिरने के कारण रात के दौरान डल झील की ऊपरी पानी की परत कुछ क्षेत्रों में जम गई थी। झील पर रहने वाले एक स्थानीय निवासी अब्दुल रशीद का कहना था कि झील के अंदरुनी हिस्से जम गए हैं और हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में झील पूरी तरह से जम जाएगी, क्योंकि ठंड तेज हो रही है। कश्मीर के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर रात के दौरान पारा शून्य डिग्री से नीचे चला गया है।
 
जानकारी के लिए कश्मीर की सर्दी 3 चरणों में समाप्त हो जाती है, जो 21 दिसंबर (चिल्लेकलां) से 40 दिनों की तीव्र अवधि के साथ शुरू होती है, इसके बाद 20 और दिन कम तीव्र (चिल्ले खुर्द) और अंत में 10 दिनों की हल्की ठंड (चिल्ले बच्चा) होती है।
 
मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नवंबर और दिसंबर के महीने अब तक के प्रमुख हिस्से के लिए शुष्क थे। इस साल कश्मीर में औसत बारिश या बर्फबारी दर्ज की गई। इसी तरह जम्मू संभाग ने 4 मानसून महीनों में 886 मिमी औसत वर्षा का अनुभव किया, जो सामान्य 826 मिमी की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है।
 
40 दिनों तक चलता है चिल्लेकलां? : कश्मीर में 21 और 22 दिसंबर की रात से सर्दी के मौसम की शुरूआत मानी जाती है। करीब 40 दिनों तक के मौसम को चिल्लेकलां कहा जाता है। चिल्लेकलां करीब 40 दिनों तक चलता है और उसके बाद चिल्ले खुर्द और फिर चिल्ले बच्चा का मौसम आ जाता है।
 
दरअसल, कश्मीर घाटी एक सर्द इलाका है। यहां साल के तकरीबन 7 महीनों में मौसम ठंडा ही रहता है। सर्दियों का मौसम शुरू होते ही तापमान में गिरावट आना शुरू हो जाती है और धीरे-धीरे यह जमाव बिंदु से नीचे चला जाता है जिससे समूची वादी शीतलहर की चपेट में आ जाती है।
 
40 दिवसीय चिल्लेकलां : 21 दिसंबर से वादी में सर्दियों का सब से कठिन दौर 40 दिवसीय चिल्लेकलां शुरू हो जाता है। चिल्लेकलां में कड़ाके की ठंड पड़ती है। आसमान घने बादलों से ढंका रहता है। इस दौरान अमूमन बर्फबारी होती है। तापमान जमाव बिंदु से नीचे बना रहता है जिसके चलते तमाम जलस्रोत जम जाते हैं।
 
20 दिवसीय चिल्ले खुर्द : चिल्ले कलां के बाद 20 दिवसीय चिल्ले खुर्द शुरू होता है। चिल्ले खुर्द चिल्लेकलां में पड़ने वाली ठंड से कम तीव्रता वाला होता है। इस दौरान भी बर्फबारी होती है लेकिन तापमान जमाव बिंदु से ऊपर आना शुरू हो जाता है।
 
10 दिवसीय चिल्लेबच्चा : चिल्लेखुर्द की समाप्ति के बाद 10 दिवसीय चिल्लेबच्चा शुरू हो जाता है। यह चिल्लेकलां व चिल्लेखुर्द में पड़ने वाली ठंड से कम तीव्रता से कम होता है। इस दौरान जमीन, जो कि तापमान के जमाव बिंदु से नीचे चले जाने के चलते ठंडी पड़ी हुई होती है, गर्म होनी शुरू हो जाती है। चिल्लेबच्चा की समाप्ति के साथ ही वादी में 70 दिनों तक रहने वाली कड़ाके की ठंड का न केवल दौर समाप्त हो जाता है बल्कि इसके साथ ही सर्दियों का मौसम भी रुखसत हो जाता है।
 
Edited by: Ravindra Gupta
लेखक के बारे में
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।.... और पढ़ें

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