जगन्नाथ मंदिर गए हैं? इन 3 पवित्र स्थानों के दर्शन किए बिना यात्रा मानी जाती है अधूरी
चार प्रमुख धामों से से एक जगन्नाथ धाम ओड़िसा के पुरी क्षेत्र में स्थित है जिसे पुरुषोत्तम और विरजा क्षेत्र कहते हैं। इसे श्रीक्षेत्र, शाक क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरि और श्री जगन्नाथ पुरी भी कहते हैं। यहां पर प्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में यहां पर जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन होता है। यदि आप भी प्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने गए हैं तो अन्य 3 स्थानों पर जाना न भूलें अन्यथा यात्रा अधूरी मानी जाएगी।
1. गुंडीचा मंदिर:
पुरी में जगन्नाथ मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर आप गुंडीचा मंदिर के दर्शन करना न भूलें। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जब भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से निकलते हैं, तो वे इसी गुंडीचा मंदिर में आते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का नाम मालवा के राजा इंद्रद्युम्न की रानी 'गुंडीचा' के नाम पर पड़ा था। राजा इंद्रद्युम्न ने ही मुख्य जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। मान्यता है कि इसी स्थान पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने राजा इंद्रद्युम्न की शर्त के अनुसार महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ (लकड़ी) की मूर्तियों का निर्माण किया था। इसलिए इसे भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थान भी माना जाता है। भगवान यहां पूरे 9 दिनों तक प्रवास (विश्राम) करते हैं। इस अवधि में गुंडीचा मंदिर में उनकी विशेष पूजा-अर्चना होती है।
9 दिनों के बाद भगवान वापस मुख्य जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं, जिसे 'बहुड़ा यात्रा' कहा जाता है। बाकी के पूरे साल यह मंदिर खाली रहता है। इसके अलावा यहां पर लोकनाथ मंदिर, लिंगराज मंदिर और अलारनाथ मंदिर भी जरूर देखें।
2. बेड़ी हनुमान मंदिर:
जगन्नाथ मंदिर के सामने के समुद्र के पास बेड़ी हनुमानजी मंदिर है जहां पर हनुमानजी पुरी और मंदिर की रक्षा करने के लिए विराजमान हैं। जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार के सामने रामदूत हनुमानजी की चौकी है अर्थात मंदिर है। परंतु मुख्य द्वार के सामने जो समुद्र है वहां पर बेड़ी हनुमानजी का वास है। यहां जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेड़ी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। भक्त लोग बेड़ी में जकड़े हनुमानजी के दर्शन करने के लिए आते हैं।
3. विमला शक्तिपीठ:
भारतीय प्रदेश उड़ीसा के विराज में उत्कल स्थित जगह पर माता की नाभि गिरी थी। इसकी शक्ति है विमला और शिव को जगन्नाथ कहते हैं। विमला शक्तिपीठ जगन्नाथ मंदिर के दक्षिण-पश्चिमी कोने में पूर्व की ओर स्थित है। मार्कण्डेय तालाब के पास पुरी में एक सप्त मातृका मंदिर भी मौजूद है। कुछ लोग इसे शक्तिपीठ कहते हैं, लेकिन, विमला मंदिर मूल है। कुछ लोग इसे विराज शक्ति पीठ भी कहते हैं, जो उड़ीसा के जाजपुर में स्थित है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यही देवी संपूर्ण जगन्नाथ क्षेत्र की रक्षा करती है। इन देवी की आज्ञा से ही सभी कार्य होते हैं। यह यहां की रक्षक देवी हैं। इन्हें योगमाया और परमेश्वरी कहा जाता है। जगन्नाथ से पहले से ही वे यहां पर विराजमान हैं। इसे पहला आदिशक्ती पीठ कहा जाता है। तंत्र और मंत्र की अधिश्वरी देवी वही है। माया और छाया उन्हीं के कंट्रोल में रहती है। यह तंत्र का सेंटर है। विरजा और विमला अलग अलग हैं या एक इसको लेकर मतभेद हैं। ओड़ियास के समुद्री तट पर स्थित पुरी के जगन्नाथ मंदिर पहुंचने के लिए किसी भी मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

