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Last Modified: शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 (13:18 IST)

भारत पर कितना होगा ट्रम्प के टैरिफ वॉर का असर, 5 सवालों से समझिए

ट्रम्प टैरिफ से वैश्विक व्यापार और भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है

trump tariff
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत सहित कई देशों से आने वाले आयात पर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा की है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार और भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। ट्रम्प का यह कदम उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। लेकिन इसका भारत जैसे देशों पर क्या प्रभाव होगा? आइए इसे पांच सवालों के जरिए आसान भाषा में समझते हैं। ALSO READ: ट्रंप टैरिफ से अमेरिकी शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों को याद आया कोरोना काल
 
प्रश्न 1: ट्रम्प ने भारत पर कितना टैरिफ लगाया है और इसका कारण क्या है?
जवाब: ट्रम्प ने भारत से अमेरिका आने वाले सामानों पर 26% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली हर चीज पर अतिरिक्त 26% कर देना होगा, जिससे सामान महंगा हो जाएगा। ट्रम्प का कहना है कि भारत अमेरिका के साथ 'सही व्यवहार' नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि भारत बहुत मुश्किल देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन वे हमसे 52% टैरिफ लेते हैं, जो ठीक नहीं है। ट्रम्प का मानना है कि भारत और दूसरे देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं, इसलिए वे इसे रोकना चाहते हैं।
विस्तृत व्याख्या: ट्रम्प का यह बयान उनकी पुरानी शिकायत को दर्शाता है कि कई देश अमेरिकी सामानों पर भारी टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका ऐसा नहीं करता। वे इसे "अनुचित व्यापार" मानते हैं और इसे संतुलित करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।
 
प्रश्न 2: इस टैरिफ से भारत के किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
जवाब: इस टैरिफ से भारत के कई बड़े निर्यात क्षेत्र प्रभावित होंगे। इनमें शामिल हैं:
रत्न और आभूषण: भारत अमेरिका को हर साल करीब 9.9 बिलियन रुपये के आभूषण निर्यात करता है। टैरिफ से यह महंगा हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स: ये भारत के बड़े निर्यात क्षेत्र हैं, जो अब महंगे होने से कम प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
कृषि उत्पाद: झींगा, बासमती चावल और भैंस का मांस जैसे उत्पादों पर भी असर पड़ेगा।
इंजीनियरिंग सामान: ऑटो पार्ट्स, बिजली उपकरण और मशीनरी भारत का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है, और यह भी प्रभावित होगा।
विस्तृत व्याख्या: विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात 30-33 बिलियन डॉलर (भारत की जीडीपी का 0.8-0.9%) तक कम हो सकता है। इससे नौकरियां और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरें कम करनी पड़ सकती हैं ताकि अर्थव्यवस्था को सहारा मिले।
 
प्रश्न 3: क्या इस टैरिफ से भारत को कोई फायदा भी हो सकता है?
जवाब: हां, कुछ फायदे भी हो सकते हैं। ट्रम्प ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया है, जो चीन (54%) और वियतनाम (46%) जैसे देशों से कम है। इसका मतलब है कि भारत के कुछ उत्पाद, जैसे कपड़े और टेक्सटाइल, अमेरिका में इन देशों की तुलना में सस्ते रह सकते हैं। साथ ही, यह भारत को यूरोप, आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देश) और अफ्रीका जैसे नए बाजारों की ओर बढ़ने का मौका देता है। यूरोपीय यूनियन के साथ भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता) भी जल्द पूरा होने वाला है, जो अमेरिकी बाजार के नुकसान की भरपाई कर सकता है।
विस्तृत व्याख्या: भारत अगर अपने व्यापार को अमेरिका से हटाकर अन्य देशों की ओर मोड़ ले, तो यह लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत की निर्भरता एक देश पर कम होगी और वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति मजबूत होगी।
 
प्रश्न 4: भारत सरकार ने इस टैरिफ पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
जवाब: भारत सरकार ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, "हम अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता जल्द पूरा करने की कोशिश जारी है।" भारत पहले ही अमेरिका को खुश करने के लिए कई कदम उठा चुका है, जैसे 8,500 औद्योगिक वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना और अमेरिकी बोर्बन व्हिस्की व हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर टैरिफ घटाना।
विस्तृत व्याख्या: भारत की कोशिश है कि ट्रम्प के साथ टकराव से बचा जाए और बातचीत से रास्ता निकाला जाए। लेकिन अगर अमेरिका अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो भारत को जवाबी टैरिफ लगाने पड़ सकते हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं।
 
प्रश्न 5: इस टैरिफ का वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: ट्रम्प के इस कदम से वैश्विक व्यापार में बड़ा बदलाव आ सकता है। यूरोपीय संघ, जापान, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश इसका जवाब अपने टैरिफ से दे सकते हैं, जिससे "ट्रेड वॉर" (व्यापार युद्ध) शुरू हो सकता है। इससे अमेरिका अकेला पड़ सकता है, क्योंकि 2022 में वैश्विक व्यापार का सिर्फ 13.4% उसके साथ हुआ था, जबकि 87% व्यापार बाकी देशों के बीच हुआ। भारत के लिए यह मौका है कि वह यूरोप, आसियान और अफ्रीका के साथ अपने रिश्ते मजबूत करे। दूसरी ओर, चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
विस्तृत व्याख्या: अगर सभी देश टैरिफ बढ़ाने लगे, तो सामान महंगा होगा, व्यापार कम होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। भारत जैसे विकासशील देशों को सावधानी से कदम उठाने होंगे ताकि वे इस संकट में फंसने की बजाय फायदा उठा सकें।
 
ट्रम्प का टैरिफ भारत के लिए चुनौती भी है और अवसर भी। यह भारत की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है, लेकिन अगर भारत सही रणनीति बनाए, जैसे नए बाजारों की तलाश और अमेरिका पर निर्भरता कम करना, तो वह इस स्थिति से मजबूत होकर निकल सकता है। आने वाले दिन दिखाएंगे कि भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापारिक तनाव किस दिशा में जाता है।
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