उबर चालकों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

पुनः संशोधित शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021 (20:40 IST)
लंदन। के ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि टैक्सी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी उबर को अपने चालकों को स्वनियोजित के तौर पर वर्गीकृत करने के बजाय न्यूनतम वेतन, छुट्टी और बीमार होने के दौरान वेतन अधिकारों के साथ श्रमिकों के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
यह निर्णय लंबे समय के एक कानूनी विवाद के बाद आया है जिसे अमेरिकी कंपनी ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत में लेकर गई थी। चालकों के एक समूह ने यह दावा करने के लिए अभियान शुरू किया था कि उन्हें स्वतंत्र तृतीय-पक्ष कान्ट्रैक्टर के बजाय श्रमिकों के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वे ब्रिटेन के कानून के तहत सभी बुनियादी रोजगार सुरक्षा के हकदार हैं।

उच्चतम न्यायालय के फैसले का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि उबर को अपने चालकों को तब से श्रमिक मानना होगा जिस दिन वे ऐप पर लॉगआन करते हैं और तब तक जब वे उससे लॉगऑफ नहीं करते। मामले में शामिल कुछ उबर चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाली विधि कंपनी ‘लेघ डे’ में एक साझेदार निगेल मैककाय ने कहा, हमारे मुवक्किल कई वर्षों से श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए हमें खुशी है कि उसका अंत आखिरकार दृष्टिगत है।

उन्होंने कहा, पहले से ही एक रोजगार न्यायाधिकरण, रोजगार अपील न्यायाधिकरण और अपीलीय अदालत ने फैसला सुनाया है कि उबर चालक श्रमिकों के अधिकारों के हकदार हैं और अब सर्वोच्च न्यायालय उसी निष्कर्ष पर आ गया है। उन्होंने कहा कि फैसले का मतलब है कि चालकों के भारी मुआवजे का दावा। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी मुआवजा दिए जाने का अनुरोध करेगी।

शुक्रवार के फैसले के बाद, रोजगार न्यायाधिकरण को अब यह तय करना होगा कि 2016 के मामले में 25 चालकों को कितना मुआवजा दिया जाए। ऐप ड्राइवर्स एंड कोरियर्स यूनियन के अध्यक्ष यासीन असलम ने कहा, मुझे इस फैसले से बहुत खुशी और राहत मिली है।(भाषा)



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