सिर्फ पांच मिनट में दिल्ली को तबाह कर सकता है पाकिस्तान : अब्दुल कादिर खान

इस्लामाबाद| Last Updated: रविवार, 29 मई 2016 (18:43 IST)
इस्लामाबाद। के के जनक ने कहा है कि पाकिस्तान के पास 1984 में परमाणु परीक्षण करने की क्षमता थी लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक के विरोध के कारण परीक्षण नहीं किया गया। 
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार खान ने कहा कि 1984 में पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण की योजना भी बना ली थी लेकिन जनरल हक ने इसका विरोध किया। जनरल हक का तर्क था कि ऐसा करने से अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के कब्जे की वजह से देश को जो अंतरराष्ट्रीय सहायता मिल रही हैं, उसमें कटौती होगी। 
 
खान ने कहा कि 1984 में हम लोग परमाणु परीक्षण करने में सक्षम थे और हमने उसकी योजना भी बनाई थी, लेकिन जनरल जिया परमाणु परीक्षण के पक्ष में नहीं थे।
 
उन्होंने कहा कि जनरल हक का मानना था कि अगर पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया तो दुनिया से पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य सहायता बंद हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश पाकिस्तान के कहूता शहर से नई दिल्ली को महज 5 मिनट में निशाना बना सकता था।
 
पाकिस्तान के परमाणु संपन्न देश बनने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम यौम-ए-तकबीर को संबोधित करते हुए खान ने कहा कि मेरी सेवा के बगैर पाकिस्तान कभी भी परमाणु शक्ति संपन्न पहला मुस्लिम राष्ट्र नहीं बन पाता। हम लोगों के लिए परिस्थितियां बहुत ही कठिन थीं लेकिन हम इसे कर पाने में सफल हुए।
 
पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में अपने साथ हुए व्यवहार के बारे में उन्होंने कहा कि हमारे देश में परमाणु वैज्ञानिकों को वह सम्मान नहीं दिया जाता जिसके वे हकदार हैं। देश के परमाणु कार्यक्रम के लिए अपनी सेवाओं के बदले हम सबसे खराब बर्ताव का सामना कर रहे हैं।
 
वर्ष 2004 में हुए वैश्विक परमाणु प्रसार कांड के केंद्र में खान ही थे जिसके बाद श्रृंखलाबद्ध नाटकीय घटनाक्रमों में जनरल मुशर्रफ ने खान को परमाणु प्रसार का एक खतरनाक नेटवर्क संचालित करने का आरोपी बताया था। 
 
जनरल मुशर्रफ की इस घोषणा के कुछ ही दिनों बाद खान का रिकॉर्ड किया हुआ एक बयान प्रसारित हुआ था जिसमें उन्होंने परमाणु प्रसार के जितने भी खुलासे हुए थे, उन सभी की जिम्मेदारी केवल अपने ऊपर ली थी। (वार्ता) 



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