Climate Change: साल 2050 तक 45 प्रतिशत तक कम हो सकती है बर्फ

International Earth Day
Last Updated: रविवार, 12 दिसंबर 2021 (17:17 IST)
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जलवायु परिवर्तन को लेकर पूरी दुनिया में चिंता है। हर देश में मौसम बि‍गड रहे हैं, कहीं बहुत ज्‍यादा सर्दी तो कहीं घनघौर बारिश और भीषण गर्मी।

जलवायु परिवर्तन दुनिया में बहुत बड़े बदलाव रहा है। आलम यह है कि कुछ देशों में तो यह अब स्‍थाई असर दिखा रहा है। कहीं बर्फ बढ़ने की रिपोर्ट आ रही है तो कहीं बर्फ कम हो सकती है, कुल मिलाकर क्‍लाइमेट पूरी तरह से गडबड़ा रहा है, जिसका असर आने वाले सालों में बेहद खराब परिणाम लेकर आ सकता है।

ऐसा एक असर पश्चिमी अमेरिका में दिख रहा है। वहां के पहाड़ों पर फैली बर्फ की मात्रा (Snowpacks) हर साल कम होती जा रही है, जिससे 2050 के बाद वहां बिना बर्फ वाले सालों की संख्या बहुत अधिक होती जाएगी।
यहां कैलीफोर्निया जैसे राज्यों में हिम पूरी तरह से गायब हो जाएगी और यहां हिम का अकाल देखने को मिल सकता है। इससे यहां के पेड़ पौधे, पशु-पक्षी, नदियां और जंगल की आग के मौसम तक पर असर देखने को मिल सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर जीवाश्म ईंधन का उत्सर्जन नहीं रोका गया तो कुछ पर्वत शृंखलाओं की बर्फ 2050 तक 45 प्रतिशत तक कम हो सकती है। जहां बर्फीले मौसम में या तो बहुत कम या फिर बिना बना बर्फ के भी हो सकते हैं।

अमेरिका के पश्चिमी इलाकों में पिछले समय की तुलना में नाटकीय बदलाव आए हैं। 1950 से 2000 तक केवल 8 से 14 प्रतिशत सालों को कम या बिना बर्फ की श्रेणी में डाला गया था, लेकिन 2050 से लेकर 2099 तक यह आंकड़ा 94 प्रतिशत पहुंच सकता है।

यह शोध नेचर रीव्यूज अर्थ एंड एनवायर्नमेंट में प्रकाशित हुआ है। सिएरा में करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय जल प्रबंधकों का माना है कि पश्चिमी अमेरिका में अपनाई जा रही जल प्रबंधन रणनीतियां भविष्य के जलवायु परिवर्तन के लिहाज से पर्याप्त नहीं है।

इस अध्ययन में बताया गया है कि सामान्य सालों में पश्चिमी अमेरिका के सिएरा नवेदा में गिरी बर्फ कैलीफोर्निया के पानी की 30 प्रतिशत को जरूरत को पूरा करती है, लेकिन हाल ही में इस राज्य में कई बर्फ के अकाल के कई दौर देखे गए हैं।

साल 2021 की वसंत में सिएरा को सामान्य बर्फीले पानी का केवल 59 प्रतिशत ही मिला है। मई के महीने तक गर्म तापमान ने उसे 10 प्रतिशत तक पहुंचा दिया और जून में तो एक तरह से पूरी की पूरी बर्फ ही गायब हो गई थी।

ये हालात भविष्य में कितने खराब हो जाएंगे यह कहना मुश्किल है क्योंकि सालाना हिम पुंज बहुत से जटिल कारकों पर निर्भर करता है। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता एलन रोड्स और उनके साथियों ने पश्चिमी राज्यों में बर्फ की मात्रा की टाइमलाइन बनाई और उन्होंने भविष्य के हिम पुंजों के पूर्वानुमानों पर हुए सभी हालिया अध्ययनों को शमिल किया।

आंकड़ों की समीक्षा करने पर शोधकर्ताओं ने पाया पश्चिम अमेरिका के सभी इलाकों में हिम पुंजों के स्तर पर साल 2050 में तेजी से बदलाव दिखेगा जिसके बाद बर्फ के अकाल जैसे साल लगातार देखने को मिलेंगे।

शोधकर्ताओं के अध्ययन का यही नतीजा रहा कि अगर वैश्विक उत्सर्जनों को नहीं रोका गया तो पश्चिमी अमेरिका में कम से बिना हिम पुंज वाले साल 35 से 60 साल बाद नियमित रूप से दिखने लगेंगे।

यह अध्ययन साफ तौर पर दर्शाता है कि कैसे ग्लोबल वार्मिंग का स्थानीय जलवायु पर असर हो रहा है और भविष्य में इस तरह के जल संकट बड़ी आबादी वाले इलाकों को चिंताजनक स्थिति में ला सकते हैं।

शोधकर्ताओं के अध्ययन का यही नतीजा रहा कि अगर वैश्विक उत्सर्जनों को नहीं रोका गया तो पश्चिमी अमेरिका में कम से बिना हिम पुंज वाले साल 35 से 60 साल बाद नियमित रूप से दिखने लगेंगे। यह अध्ययन साफ तौर पर दर्शाता है कि कैसे ग्लोबल वार्मिंग का स्थानीय जलवायु पर असर हो रहा है और भविष्य में इस तरह के जल संकट बड़ी आबादी वाले इलाकों को चिंताजनक स्थिति में ला सकते हैं।

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि सिएरा नेवादा और कैस्केड जैसी पर्वत मालाओं में गर्म प्रशांत महासागर से नम हवा आती है इसी लिए कैलीफोर्निया के इन पर्वतों में तेजी से बर्फ पिघलती है। अन्य पर्वतों की तुलना में ये पर्वत दोगुनी दर से बर्फ गंवाते हैं।

ऐसे इलाकों में बारिश से पानी ना जमा हो पाना भी एक बड़ी समस्या रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नीति निर्माताओं को अपने जल आपूर्ति संरचना व्यवस्था में बदलाव करना होगा। और यह दुनिया के बाकी देशों के लिए सबक है।



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