15 जनवरी भारतीय सेना दिवस, जानिए क्यों मनाया जाता है?

Indian Army Day
 


सेना दिवस (Indian 2022) हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थलसेना की वीरता, जांबाजी, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी को याद करता है। यह दिन फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) के सम्मान में मनाया जाता है। 1899 में कर्नाटक के कुर्ग में जन्‍म लेने वाले फील्ड मार्शल करियप्पा ने सिर्फ 20 साल की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में नौकरी शुरू की थी। साल 1953 में करियप्पा सेना से रिटायर हो गए थे।


भारतीय सेना (Indian Army) का गठन ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने वर्ष 1776 में कोलकाता में किया। उस समय भारतीय सेना ईस्ट इंडिया कंपनी की सैन्य टुकड़ी थी, जिसे बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना का नाम मिला और अंत में भारतीय थल सेना (Day) के तौर पर देश के जवानों को पहचान मिली। भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक घटना वो है, जब फील्ड मार्शल केएम करियप्पा आजाद भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख 15 जनवरी 1949 को बने थे।

सन् 1947 में करियप्पा (Cariappa) ने भारत-पाक के बीच हुए युद्ध में भारतीय सेना की कमान संभाली थी और पाकिस्‍तान को धूल चटा दी थी। करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे, जिन्होंने 15 जनवरी 1949 में सर फ्रैंसिस बुचर से प्रभार लिया था। हालांकि वे यह खिलाब पाने वाले दूसरे शख्‍स थे, इससे पहले 1973 में भारत के पहले फील्ड मार्शन बनने का सम्मान सैम मानेकशॉ (Sam Manekshaw) को प्राप्‍त है।

15 जनवरी को दिल्ली में सेना कमान मुख्यालय के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में सैन्य परेड और शक्ति प्रदर्शन के अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करके सेना दिवस मनाया जाता है। इस दिन दिल्ली के परेड ग्राउंड पर आर्मी डे परेड का आयोजन होता है। आर्मी डे के तमाम कार्यक्रमों में से यह सबसे बड़ा आयोजन होता है।
जनरल ऑफिसर कमांडिंग, हेडक्वार्टर दिल्ली की अगुवाई में यह परेड निकाली जाती है। आर्मी चीफ सलामी लेते हुए परेड का निरीक्षण करते हैं। ये परेड भी गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा होती है। आर्मी डे पर आर्मी चीफ बेहतरीन सेवाओं के लिए जवानों को सम्मानित करते हैं और उनकी हौसला अफजाई करते हैं।
फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (Field Marshal Cariappa) को 14 जनवरी 1986 को फील्ड मार्शल के खिताब से नवाजा गया था। 15 मई 1993 को बेंगलुरु में उनका निधन हो गया था, लेकिन भारतीयों के दिलों में वे सदा अमर रहेंगे।

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