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राजनीति तो पांव की जूती है...

इंदौर रिलीजन कॉन्क्लैव में कवि सत्यनारायण सत्तन ने कहा

Updated: शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018 (12:20 IST)
इंदौर। मशहूर कवि और भाजपा के पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन ने ‘हमसाज’ के दूसरे दिन रूबरू कार्यक्रम में कहा कि राजनीति तो जूती की तरह है, जबकि साहित्य या काव्य मंच सिर की पगड़ी की तरह है।
 
सत्तन ने कहा कि काव्य का मंच हिन्दुस्तान ही पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांधने की ताकत रखता है। किसी भी मजहब में तोड़ने की बात नहीं लिखी है। साहित्य जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति तोड़ने का। राजनीति तो पांव की जूती की तरह है।
 
उन्होंने कहा कि समन्यव और सामंजस्य के लिए हमें गांधी के मार्ग को अपनाना चाहिए। सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलने की कुशलता और खूबी सिर्फ महात्मा गांधी में थी।
 
मोहब्बत से जुड़े एक सवाल पर किन्नर महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि मोहब्बत ही मजहब है। पीर फकीरों के दर पर सभी सजदा करते हैं, जबकि सत्ता की भूख के चलते समाज में कटुता बढ़ गई है। ‍त्रिपाठी ने कहा कि भारत के टुकड़े नहीं होते तो आज देश में हिन्दू और मुसलमान की बात भी नहीं होती। यदि हम मोहब्बत करना शूरू कर देंगे तो सारे झगड़े ही खत्म हो जाएंगे।
 
उन्होंने किन्नर समुदाय की बात करते हुए कहा कि हमें प्यार देकर देखिए हम निभाना भी जानते हैं। गीता, कुरान, बाइबल आदि धर्मग्रंथों के सार से एक नई किताब तैयार करने की बात पर त्रिपाठी ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो एक और दुकान खुल जाएगी। ज्यादा अच्छा है कि हम पुराना कचरा साफ करें।
 
उन्होंने कहा कि समय के साथ धर्म का दृष्टिकोण भी बदल रहा है। त्रेता में राम ने आदिवासी शबरी के झूठे बेर खाए थे, लेकिन आज धर्म जात-पांत में बंटकर रह गया है। 
 
किन्नर त्रिपाठी ने कहा कि आज के दौर में नारियों के वस्त्र हरण कर बलात्कार किए जा रहे हैं, फिर भी हम खुद को सभ्य समाज कहते हैं। मुस्लिम समुदाय से उन्होंने कहा कि यदि मुसलमान हुजूर (मोहम्मद पैगंबर) का एक प्रतिशत भी अपने जीवन में उतार लें तो सारे तमाशे बंद हो जाएंगे। ‍त्रिपाठी ने कहा कि यदि समाज को आगे ले जाना है तो महिलाओं को उनका धार्मिक वजूद देना होगा। 
 
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह अजमेर के गद्दीनशीं हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भाईचारे से ही अमन का रास्ता निकलेगा। अजमेर की गंगा जमुनी तहजीब का बखान करते हुए चिश्ती ने कहा कि वहां 800 साल से शाकाहारी लंगर चल रहा है। उसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग भी नहीं किया जाता है। 
 
उन्होंने अपनी विदेश यात्रा जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वहां लाइब्रेरी में एक किताब देखी थी, जिसमें फारसी में ओम नम: शिवाय लिखा हुआ था। उन्होंने कहा कि पहले विचारों का आदान प्रदान होता था, लेकिन अब यह कम दिखाई देता है। ज्यादा अच्छा होगा कि हक एक दूसरे से सीखते रहें। कायक्रम में सूत्रधार की भूमिका निभा रहे संजय पटेल ने धर्म, मोहब्बत, समन्वय से जुड़े कई सवाल उठाए। 

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