इंदौर के ऑटोमोबाइल मार्केट और गैराजों से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पर्यावरण को बचाने और ईंधन का विकल्प बनने का दावा करने वाला एथेनॉल (Ethanol-Blended Petrol) अब आम जनता की गाड़ियों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। शहर के मैकेनिकों के मुताबिक उनके पास रोज़ाना 4 से 5 वाहन ऐसे पहुंच रहे हैं, जो एथेनॉल के साइड इफेक्ट्स के कारण बीच सड़क पर दम तोड़ रहे हैं। गाड़ियों की टंकियों में कचरा जमने से लेकर कार्बोरेटर और फ्यूल पंप पूरी तरह चोक हो रहे हैं। मैकेनिकों का साफ तौर पर कहना है कि शुरुआती दौर में भले ही यह समस्या कम दिख रही हो, लेकिन अगर वाहनों की तकनीक में बदलाव किए बिना इसी तरह एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाले समय में बहुत बड़ी संख्या में गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो सकती हैं। जानते हैं इस जमीनी हकीकत पर इंदौर के मैकेनिकों और गैराज संचालक क्या कह रहे हैं।
मैकेनिक सागर (आस्था टॉकीज, भमोरी)
फ्यूल टैंक में पानी और कचरा जमने की समस्या बहुत बढ़ गई है : पिछले कुछ हफ्तों से हमारे पास रोज़ाना 4 से 5 गाड़ियां ऐसी आ रही हैं जो अचानक चलते-चलते बंद हो जाती हैं। जब हम उनकी जांच करते हैं, तो पता चलता है कि फ्यूल टैंक (टंकी) के अंदर अजीब सा कचरा जमा हो गया है। एथेनॉल हवा से नमी सोख लेता है, जिससे टंकी के अंदर जंग और पानी जैसी परत बन रही है। हमें पूरी टंकी खोलकर साफ करनी पड़ रही है। अभी तो लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, लेकिन अगर यही हाल रहा तो आगे चलकर गाड़ियों का मेंटेनेंस का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।
मैकेनिक संजय (विजय नगर क्षेत्र)
कार्बोरेटर और फ्यूल पंप पूरी तरह चोक हो रहे हैं : एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल गाड़ियों के पार्ट्स के लिए जहर साबित हो रहा है। यह ईंधन कार्बोरेटर को खराब कर रहा है और जो नई गाड़ियां हैं, उनके फ्यूल पंप को भी जाम कर रहा है। एथेनॉल के कारण रबर के पाइप और प्लास्टिक के पार्ट्स गलने लगते हैं, जिससे बारीक कचरा पंप में फंस जाता है। अभी ऐसी शिकायतों वाली गाड़ियां कम संख्या में दिख रही हैं, क्योंकि लोग अभी भी इस बदलाव से अनजान हैं। लेकिन अगर गाड़ियों को एथेनॉल-फ्रेंडली बनाए बिना इसी ईंधन का इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाले समय में बहुत बड़े पैमाने पर गाड़ियां खराब होंगी।
मैकेनिक इकबाल खान (मालवा मिल)
पुरानी गाड़ियों के लिए यह ईंधन एक बड़ा खतरा है : हमारे गैराज में आने वाले दोपहिया वाहनों में सबसे ज्यादा समस्या आ रही है। एथेनॉल के मिक्सिंग की वजह से इंजन सही से कंबशन (दहन) नहीं कर पा रहा है और गाड़ियां मिसिंग मार रही हैं। अभी तो यह समस्या शुरुआती दौर में है, इसलिए वाहनों की संख्या कम है। लेकिन मेरा मानना है कि अगर गाड़ियों की तकनीक में सुधार किए बिना इसी तरह एथेनॉल मिक्स पेट्रोल बिकता रहा, तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में गाड़ियां सड़कों पर खड़ी हो जाएंगी। खासकर जो पुरानी गाड़ियां हैं, वे इस ईंधन को बिल्कुल भी नहीं झेल पाएंगी।
मैकेनिक राजेश शर्मा (बडी भमौरी ट्रांसपोर्ट नगर, इंदौर)
बिना तैयारी के लागू की गई पॉलिसी, जिसका हर्जाना आम जनता भुगत रही है : सरकार ने अपनी एथेनॉल पॉलिसी तो लागू कर दी, लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है, यह देखने कोई नहीं आ रहा। देश में करोड़ों गाड़ियां आज भी पुरानी तकनीक (BS4 या उससे पहले की) पर चल रही हैं, जिनके इंजन और पार्ट्स एथेनॉल झेलने के लिए बने ही नहीं हैं। कंपनियों ने गाड़ियां बदली नहीं और सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल बढ़ा दिया। नतीजा यह है कि रोज़ाना हमारे पास लोग रोते हुए आते हैं कि साहब, कल ही पेट्रोल डलवाया था और आज फ्यूल पंप फुक गया या कार्बोरेटर गल गया। सरकार को पहले कंपनियों को मजबूर करना चाहिए था कि वे एथेनॉल-फ्रेंडली गाड़ियां बनाएं, उसके बाद यह पॉलिसी लानी थी। यह सीधे-सीधे आम आदमी की जेब पर डाका है।
मैकेनिक गुरुप्रीत सिंह (पंढरीनाथ)
कागजों पर पर्यावरण का फायदा, पर हकीकत में गाड़ियों की बर्बादी : सरकार कह रही है कि एथेनॉल से प्रदूषण कम होगा और देश का पैसा बचेगा, लेकिन आम गाड़ी मालिक का जो नुकसान हो रहा है, उसका हिसाब कौन देगा? एथेनॉल मिक्स पेट्रोल गाड़ियों के इंजन को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। रबर की नली, प्लास्टिक के पार्ट्स और नोजल इतनी जल्दी खराब हो रहे हैं कि ग्राहकों को हर महीने गैराज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगर सरकार की यही पॉलिसी चलती रही, तो आने वाले दो-तीन सालों में इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां कबाड़ बनेंगी कि संभालना मुश्किल हो जाएगा। यह पॉलिसी सिर्फ कागजों पर अच्छी है, सड़कों पर चल रहे वाहनों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसी है।
एथेनॉल के साइड इफैक्ट्स :
पानी को सोखना (Moisture Attraction): एथेनॉल हवा से नमी (पानी) को बहुत जल्दी सोख लेता है। अगर गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहे, तो यह पानी और ईंधन को अलग कर देता है, जिससे इंजन के अंदर जंग लग सकती है।
पार्ट्स का गलना: एथेनॉल एक अच्छा विलायक (Solvent) है। यह पुरानी गाड़ियों में लगे रबर के पाइप, प्लास्टिक और एल्युमिनियम के पार्ट्स को धीरे-धीरे गला देता है।
अनाज का संकट: एथेनॉल बनाने के लिए मक्का, गन्ना और अन्य खाद्यान्नों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अगर इसका उत्पादन बहुत ज्यादा बढ़ा दिया जाए, तो खाद्य फसलों की कमी हो सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।
इंदौर के गैराजों से सामने आई जमीनी हकीकत के मुताबिक, पेट्रोल में बढ़ता एथेनॉल का मिश्रण (Ethanol Blending) अब आम वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत और आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। मैकेनिकों के अनुभव बताते हैं कि बिना पुख्ता तकनीकी तैयारी और पुरानी गाड़ियों की क्षमता को नजरअंदाज कर लागू की गई सरकार की यह पॉलिसी, वाहनों के इंजन, कार्बोरेटर और फ्यूल पंप को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। रोज़ाना गैराजों में पहुंच रही खराब गाड़ियों की संख्या इस बात का संकेत है कि यदि इस समस्या का जल्द कोई तकनीकी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर वाहन कबाड़ में तब्दील हो सकते हैं और आम जनता को इसका भारी हर्जाना भुगतना पड़ेगा।