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37 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए व्याख्याता भूपेश यादव

बालिका शिक्षा और जनजातीय उत्थान में दिया महत्वपूर्ण योगदान

भूपेश यादव व्याख्याता सेवानिवृत्ति
मध्य प्रदेश सरकार के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित माता शबरी कन्या आवासीय विद्यालय परिसर में कार्यरत राजनीति विज्ञान के व्याख्याता भूपेश यादव 37 वर्षों की दीर्घ एवं समर्पित सेवा के पश्चात सेवानिवृत्त हो गए। शिक्षकों और विद्यार्थियों में समान रूप से लोकप्रिय यादव के सम्मान में संस्था द्वारा विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों ने उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर प्राचार्य लोकेन्द्रसिंह चौहान ने यादव को अभिनंदन पत्र भेंट किया। 
 
भूपेश यादव ने अपने सेवाकाल के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। विशेष रूप से पिछले 10 वर्षों से अधिक समय तक उन्होंने एकलव्य आवासीय विद्यालय (विशेष पिछड़ी जनजाति) में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करते हुए बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा, उन्नति और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए।
 
शिक्षण यात्रा की शुरुआत : यादव की शिक्षण यात्रा की शुरुआत 1989 मे अनुसूचित जनजाति क्षेत्र सरदारपुर से जीव विज्ञान के शिक्षक के रूप में हुई। 1993 से 2015 तक सागौर (धार) में पदस्थ रहे। इस दौरान आपके मार्गदर्शन में बने कई विज्ञान मॉडल इंस्पायर अवॉर्ड में राज्य स्तर तक पहुंचे। 2016 से 2025 तक यादव ने एकलव्य आवासीय विद्यालय, इंदौर में (विशेष पिछड़ी जनजाति) के प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करते हुए बैगा, भारिया, सहरिया जनजाति के छात्र-छात्राओं के उत्थान के लिए कई नवाचार किए। इनमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक व मानसिक विकास के लिए मन की बात, उड़ान आदि कार्यक्रम बहुत उपयोगी रहे।
शिक्षा के अलावा भी योगदान : शिक्षा के साथ विभाग की विभिन्न योजनाओं के साथ विभागीय न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण में भी यादव की भूमिका अहम रही। उनकी अगुवाई में न केवल स्कूल के शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ, बल्कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की गईं। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका सराहनीय रही। यादव की सेवानिवृत्ति पर संस्था परिवार ने उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना करते हुए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उनके योगदान को सदैव प्रेरणादायक बताया।
 
सहकर्मियों ने की सराहना : शिक्षिका प्रियंका जोशी ने कहा कि सर हमारे मेंटर के रूप में रहे। हमेशा सबका मार्गदर्शन किया। मेरी नजर में सर सांताक्लॉज हैं। शिक्षक, विद्यार्थी सभी की मांग पूरी करते हैं। विभाग में भी हर कठिन कार्य में यादव सर को याद करना ही पड़ता था। खुशबू गुथरिया ने कहा- सर ने अपने विचार, व्यवहार से हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। सर अपने ज्ञान, विनम्रता, मित्रत्व से सभी के दिलों में स्थान बना लेते हैं। उन्होंने हम सभी को बड़े भाई की तरह गाइड किया है। 
 
व्यायाम निर्देशक नीलिमा पाटिल ने कहा- सर का व्यवहार सभी के साथ बड़े भाई की तरह रहा और हमारी हर समस्या का हल सर के पास था। अनिता शर्मा ने कहा कि एकलव्य संस्था में यादव सर ने इतनी अच्छी नींव डाली कि जो भी आया उस सांचे में ढल गया। सर के साथ हम सभी सुरक्षित थे। रसायन शास्त्र की व्याख्याता नीतू बैस ने फिल्मी अंदाज में कहा- सर ने यदि कोई कमिटमेंट कर दी तो फिर वे अपनी भी नहीं सुनते। फिर उसे कोई बदल भी नहीं सकता। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala